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Think And Grow Rich By Napoleon Hill |
About Book
सक्सेस किसी भी प्रोफेशन या करियर में मिल सकती है. और एक अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा इंसान भी एक अमीर बन सकता है. और ये सीक्रेट लेखक अपने रीडर्स के साथ बांटना चाहता है कि आखिर कैसे 500 अमीर लोगो को अपनी जिंदगी में इतनी बड़ी सफलता मिली ? और ये सीक्रेट सिर्फ उनके लिए है जो इसे जानने के लिए तैयार है. जिन्होंने ये सीक्रेट एप्लाई किया उनका अमीर बनने का सपना पूरा हुआ है.
1. इस बुक से हम क्या सीखेंगे?
अगर आप अपनी जिंदगी में पैसा, मान-सम्मान, पर्सनेलिटी, सुकून और ख़ुशी चाहते है तो इसका राज आप उन अमीर लोगो से जान सकते है. जैसे-जैसे आप ये तेरह स्टेप्स पार करेंगे, उस सीक्रेट के और करीब आते जायेंगे. अब तैयार हो जाईए क्योंकि जो मौका अब आपके हाथ लगने वाला है वो आपकी लाइफ बदल कर रख देगा. नेपोलियन हिल ने हमें इस सीक्रेट का एक क्ल्यू दिया है "सब तरक्की, सब अमीरी की शुरुवात के पीछे एक आइडिया है.
2. ये बुक किस किसको पढनी चाहिए?
हर कोई इंसान जो अमीर बनने के सपने देखता है लेकिन उसे पता नहीं है कि अमीर बनने के लिए उसे क्या और कैसे करना है. इस बुक में दिए रियल लाइफ एक्सपिरियेश प्रेक्टिकल लाइफ में काफी काम आ सकते है.
3. इस बुक के ऑथर कौन है?
26 अक्टूबर 1883 में जन्मे नेपोलियन हिल एक अमेरिकन ऑथर थे. थिंक एंड ग्रो रिच आल टाइम 10 बेस्ट सेलर सेल्फ हेल्प बुक्स की लिस्ट में आती है. उनकी इस बुक ने लाखो लोगो के अमीर बनने का सपना पूरा किया है. और आज भी कर रही है. तो देर किस बात की आज ही इस बुक को पढकर आप भी रिच बन सकते है.
विषय - सूची
अध्याय एक : परिचय
अध्याय दो : इच्छाशक्ति
अध्याय तीन : विश्वाश
अध्याय चार : आतमसुझाव
अध्याय पाँच : विशिष्ट ज्ञान
अध्याय छह : कल्पना
अध्याय सात : सुव्यवस्थिति योजना
अध्याय आठ : निर्णय
अध्याय नौ : लगन
अध्याय दस : मास्टर माइंड की शक्ति प्रेरक बल
अध्याय ग्यारह: सेक्स रूपांतरण का रहस्य
अध्याय बारह: अंतर्मन
अध्याय तेरह : मन
अध्याय चौदह : छठी इन्द्रिय
अध्याय पन्द्रह : डर के छह भूतो को कैसे निकाला जाय
अध्याय सोलोह : Summry for you
अध्याय सतराह : My Opeanion for this book
अध्याय एक : परिचय
विचारों में असीम शक्ति होती है। अगर इन विचारों में उद्देश्य, दृढ़ निश्चय और मजबूत इरादों का समावेश हो जाए तो आप दौलतमंद बन सकते हैं एवं वह सब कुछ हासिल कर सकते है, जो आपने सोचा हुआ है।
एडविन सी. बन्सं ने यह खोज निकाला कि कैसे विचार शक्ति से धनवान बना जा सकता है। इस खोज में सफलता पहले प्रयास में नहीं हासिल हुई, बल्कि वह धीरे-धीरे प्राप्त हुई। इस महान रहस्य की खोज की शुरुआत, बर्न्स की उस चाहत से हुई, जो उसे महान एडिशन का व्यावसायिक भागीदार बनाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थी। बर्न्स की उस इच्छा शक्ति की सबसे बड़ी बात यह थी कि वह स्पष्ट थी कि उसे एडिसन के साथ काम करना है, न कि एडिशन के दफ्तर में काम करना है। आप बस की कहानी को ढंग से पढ़िए, उसकी सोच वास्तविकता में कैसे तब्दील हुई? फिर आपको वे 13 नियम बेहतर समझ आएँगे, जो आपको दौलतमंद बनाते है।
जब वर्न्स के मन में यह विचार कौंधा, तब वह इस हालत में नहीं था कि वह इस पर कोई कदम उठा सके। उसके रास्ते में दो चुनौतियाँ थी, पहली यह कि एडिशन से उसकी कभी मुलाकात नहीं हुई थी, न ही एडिशन उसे जानता था। दूसरा यह उसके पास रेल का भाड़ा देने का इतना पैसा नहीं था कि वह ऑरेंज, न्यू जर्सी तक पहुँच सके। ये चुनौतियाँ इतनी पर्याप्त तो थी कि अधिकतर व्यक्तियों के आत्मविश्वास को डगमगा दे और उनकी सोच यहीं पर दम तोड़ दे।
परंतु उसके इरादे इतने कमजोर नहीं थे। वह दृढ प्रतिज्ञ था उसने हार नहीं मानी, बल्कि बिना टिकेट मालगाड़ी से यात्रा करके ईस्ट अरिंज पहुँच गया।
उसने एडिशन के प्रयोगशाला में खुद का परिचय दिया, और कहा कि वह इस अविष्कारक के साथ व्यवसाय करने आया हुआ है। काफी समय के पश्चात् एडिशन ने इस पहली मुलाकात का खुलासा कुछ इसप्रकार किया था, वह मेरे सामने एक सामान्य पर्यटक की तरह खड़ा था, परंतु उसके चेहरे का तेज देखकर यह पता चल गया था कि वह जिस कारणवश यहाँ आया है, उसके लिए दृढ प्रतिज्ञ है। इतने साल के अनुभव में मुझे यह ज्ञान हो गया था कि अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो सारी कायनात तुम्हे उससे मिलाने की कोशिश में जुट जाती है। मैंने भी उसके मजबूत इरादों को भौंपकर उसे एक मौका दिया दे दिया था और उसने इस बात को पूरी तरह से दिमाग में बैठा लिया था कि उसे इस सफलता को पाकर ही रहना है। धीरे-धीरे उसके कार्यों ने भी यह सिद्ध कर दिया कि मैंने उसको मौका देकर कोई गलती नहीं की थी उस नौजवान बर्न्स ने उस वक्त एडिशन से क्या कहा यह उतना महत्त्वपूर्ण नहीं था, जितना कि उसने इस बारे में सोचा कि उसे एडिशन के साथ में काम करना है। इसबात पर एडिशन ने भी अपनी सहमति जताई थी।
अगर विचार शक्ति की यह बात हर पाठक तक पहुँच जाए तो उसे संपूर्ण किताब पढ़ने की कोई जरुरत नहीं है। बस अपने पहले ही साक्षात्कार के बाद एडिशन के व्यवसाय में भागीदार नहीं बन गया था। बल्कि उसे एडिशन के ऑफिस में बहुत ही कम मेहनताना में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ था यह कार्य ऐसा था, जो एडिशन के लिए बहुत कम उपयोगी था पर बन्स के लिए बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण इस अवसर ने बर्न्स को अपने होनेवाले भागीदार को अपनी व्यापार कुसलता दिखाने का मौका दिया था उसका होनेवाला भागीदार वहाँ उसके काम को परख सकता था।
कई महीने बीत चुके थे, पर अपरोक्ष रूप से ऐसा कुछ भी घटित नहीं हो रहा था जिससे बर्न्स अपने उस निश्चित लक्ष्य तक पहुँच सके, जो उसने अपने दिलो-दिमाग में संजो रखा है पर उसके मन में कुछ ऐसी प्रक्रियाए चल रही थी, जिनका परिणाम बाद में निकला। पर तब तक वह अपने मनो मष्तिष्क में एडिशन का व्यावसायिक पार्टनर बनने के अपने विचार पर और दृढ़ता पूर्वक सोचने लगा था।
मनोवैज्ञानिको ने यह सही कहा है जब कोई विचार दिमाग पर हावी हो जाए, तो वह वास्तविकता में आपके सामने प्रकट हो जाता है।' बर्न्स पूर्णतया एडिशन के साथ काम करने के लिए तैयार था और वह तब तक दृढ़प्रतिज्ञ होकर लगा रहा, जब तक उसने वह हासिल नहीं कर लिया, जिसे वह इतने समय से खोज रहा था।
उसने कभी इस बात के लिए नहीं विचार किया इतना परेशान होने की क्या जरूरत है चलो, सेल्समैन की नौकरी असानी से मिल जायेगी। बल्कि उसने यह विचार किया, मैं यहाँ पर एडिशन के साथ व्यवसाय करने के लिए आया हूँ मैं तब तक पीछे नहीं हदूंगा, जब तक मैं इस मकसद में जीत नहीं जाता हूँ, चाहे बची हुई सारी जिंदगी यहीं पर गुजारनी पड़े, यह सच ही है कि अगर आप एक उद्देश्य को लेकर पूरी जिंदगी जीते है तो आप एक अलग ही कहानी लिख सकते हैं।
शायद उस समय बर्न्स को यह बात न पता रही हो, परंतु उसकी मजबूत इच्छा शक्ति और दृढ़ता ने बड़ी से बड़ी बाधाओ को पार करके वह अवसर दिला दिया, जिसको वह तलास कर रहा था। अवसरों की एक खास बात होती है, ये बिल्कुल अलग अंदाज में हमारे सामने आते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं जैसा आपने सोचा होता है, उससे बिल्कुल अलग दिशा से भी ये अवसर अवतरित होते हैं। ऐसा कह सकते हैं कि अवसरों की यह चालाकी होती है कि वे पिछले दरवाजे से आते है और कई दफा तो दुर्भाग्य तथा क्षणिक हार के रूप में भी सामने आ जाते हैं। शायद यही कारण है कि अधिक से अधिक लोग इन अवसरों को पहचानने में चूक जाते है।
उस समय एडिशन ने एक नई डिवाइस खोजी थी, जिसका नाम एडिशन डिस्टार्टिंग मशीन था। बाद में उसे एडिफोन नाम से भी जाना गया एडिशन के सेल्समेन उस मशीन के लिए अधिक उत्साही नहीं थे उन्हें ऐसा लग रहा था कि इसे बेचने के लिए उन्हें कुछ अधिक ही प्रयास करना पड़ेगा। बर्न्स को इसी मौके की तो तलास थी। उसने इस अवसर का लाभ उठाया और तुरंत उस मशीन को बेचने की अपनी इच्छा जाहिर की। यह वह मशीन थी, जिसके लिए दुनिया में सिर्फ दो ही लोग उत्साहित थे, एक बर्न्स और दूसरा उस मशीन का अविष्कारक उसने इतनी सफलता पूर्वक इस मशीन को बेचा कि एडिशन ने बर्न्स को उस मशीन को संपूर्ण देश के बाजार में वितरित करने का कॉन्ट्रैक्ट ही दे दिया। इस व्यवसाय की सफलता ने इसे एक नया स्लोगन दे दिया 'Made by Edison and installed by Barnes' (एडिशन ने बनाया और बर्न्स ने लगाया ) यह व्यावसायिक संधि इतनी सफल हुई कि इसने बर्न्स को बहुत धनवान बना दिया। पर इससे अधिक उसने यह सिद्ध कर दिया कि अगर आप चाह ले तो आप भी अमीर बन सकते है।
असल में बर्न्स ने कितना धन कमाया, इसकी सही सही जानकारी तो नहीं है पर यह अनुमान हैं कि उस समय उसने 20 से 30 लाख डॉलर कमाए थे जो भी यह संख्या रही हो, यह उस ज्ञान के सामने फीकी पड़ जाती है, जिन नियमों की मदद से बर्न्स ने वह हासिल किया, जो वह असल में चाहता था।
बन्स ने तब यह सोच लिया था कि उसे एडिसन के साथ भागीदारी करनी है, जब उसके पास इसकी शुरुआत करने के लिए कुछ भी नहीं था। सिवाय इसके कि वह इस विचार को और दृढ़ता के साथ सोचे और इस पर पूरे इरादे के साथ अमल करे, जब तक वह उसे हासिल न कर ले।
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