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The 7 Habits Of Highly Effective People Book Summary In Hindi


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The 7 Habits Of Highly Effective People Book Summary In Hindi


About Book


एक हाइली इफेक्टिव आदमी कौन होता है? एक हाइली इफेक्टिव इंसान वो होता है जिसका केरेक्टर अच्छा हो. जिसके पास स्ट्रोंग वेल्यूज़ हो. क्या आपकी कभी अपने किसी रिश्तेदार या कलीग से खटपट हुई है ? किसी से ये उम्मीद रखना कि वे बदले, उससे पहले आपको खुद को बदलना होगा. क्या आपको लगता है कि आपमें खुद को इम्प्रूव करने की क्वालिटी है?

एक हाइली इफेक्टिव इंसान के दुसरे लोगो के साथ भी अच्छे रिलेशन होते है. वो अपने परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों और कलीग्स के साथ मिलजुल कर रहता है. और एक अच्छा रिलेशन सालो साल तक चलता है.

एक हाइली इफेक्टिव इंसान कैसे बना जाए, ये आप इस किताब को पढ़कर सीख सकते है. जो भी आपकी जॉब हो, आप इस किताब से ये बात जान सकते है. जैसे कि अगर आप एक पेरेंट है तो अपने बच्चे के साथ अपना रिलेशनशिप और भी बेहतर बना सकते है. अगर आप एक बॉस है जो इस किताब में आपको ऐसे टिप्स मिलेंगे जिनसे आप और भी अच्छे लीडर बन पायेंगे. 

ये किताब किस के लिए है?


1) जो इफेक्टिव लोगो की सात आदतों को जानना चाहते है ? 
2) जो सिर्फ एक कॉमन ज़िन्दगी नहीं जीना चाहते बल्कि अपनी ज़िन्दगी में कुछ बड़ा करना चाहते हैं.

इस किताब के ऑथर कौन है ? 


स्टीवन कवी एक अमेरिकन ऑथर, बिजनेसमैन और एक बहुत अचे स्पीकर थे टाइम मैगजीन ने इन्हे टॉप 25 मोस्ट इन्फ्लुएंटीएल लोगो की लिस्ट में डाला है | स्टीवन कवी उटाह स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहे है | इनकी किताब 7 हैबिट्स ऑफ़ हाइली इफेक्टिव पीपल एक बेस्ट सेलर रही है।


एक हाइली इफेक्टिव आदमी कौन होता है? एक हाइली इफेक्टिव इंसान वो होता है जिसका केरेक्टर अच्छा हो. जिसके पास स्ट्रोंग वेल्यूज़ हो. क्या आपकी कभी अपने किसी रिश्तेदार या कलीग से खटपट हुई है? किसी से ये उम्मीद रखना कि वे बदले, उससे पहले आपको खुद को बदलना होगा. क्या आपको लगता है कि आपमें खुद को इम्प्रूव करने की क्वालिटी है? एक हाइली इफेक्टिव इंसान के दुसरे लोगो के साथ भी अच्छे रिलेशन होते है. वो अपने परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों और कलीग्स के साथ मिलजुल कर रहता है. और एक अच्छा रिलेशन सालो साल तक चलता है.


एक हाइली इफेक्टिव इंसान कैसे बना जाए, ये आप इस किताब को पढ़कर सीख सकते है. जो भी आपकी जॉब हो, आप इस किताब से ये बात जान सकते है. जैसे कि अगर आप एक पेरेंट है तो अपने बच्चे के साथ अपना रिलेशनशिप और भी बेहतर बना सकते है. अगर आप एक बॉस है जो इस किताब में आपको ऐसे टिप्स मिलेंगे जिनसे आप और भी अच्छे लीडर बन पायेंगे. जब आपका केरेक्टर अच्छा हो तो लोग भी आपसे नज़दीकी बढ़ाना चाहते है.


इसीलिए तो "द सेवेन हेबिट्स ऑफ़ हाइली इफेक्टिव पीपल" एक इंटरनेशनल बेस्ट सेलर है. ये किताब केरेक्टर इम्प्रूव करने में फोकस करती है. ज़्यादातर किताबे आपको इस बारे में किलेंगी कि दोस्त कैसे बनाये या लोगो को इम्प्रेस कैसे करे मगर सेवन हैबिट्स आपको सबसे पहले एक इफेक्टिव इंसान बनाने पर फोकस करती है. अगर आपकी पर्सेनिलिटी अच्छी है तो बेशक आप भी एक इफेक्टिव इंसान बन सकते है मगर वो बस थोड़े टाइम के लिए होगा. लोगो को जल्द ही पता चल जाएगा कि आपके हर काम के पीछे कोई मतलब, कोई मोटिव है. लेकिन अगर आपका केरेक्टर अच्छा है तो वो लाइफ टाइम तक आपके साथ रहेगा. आप अपने आस-पास के लोगो को इन्फ्लुएंस करते रहेंगे और आपको इसका पता भी नहीं चलेगा. लेकिन याद रखे कि आपको सबसे पहले अपने अन्दर से शुरू करना है. तो क्या आप तैयार है चेंज होने के लिय? क्या आज आप एक हाइली इफेक्टिव पर्सन बनेगे ?


हैबिट 1 (PROACTIVE) प्रोएक्टिव बने


प्रोएक्टिव बनने का मतलब क्या है ? साकोलोजिस्ट विक्टर फ्रेंकल कहते है "हमारे आस-पास जो भी कुछ होता है हम उसे बदल नहीं सकते" लेकिन हम इस पर कैसे रीस्पोंड करे ये हमारे हाथ में है. प्रोएक्टिव होने का मतलब होता है कि दुसरे लोग चाहे जो भी ओपिनियंस दे या जैसा भी उनका बेहेवियर हो हमें उससे अफेक्टेड नहीं होना है. जब लोग हमारे बारे में कुछ बुरा बोलते है तो कमी हमारे अंदर नहीं होती बल्कि उनमे होती है. जो नेगेटिव बात वो आपके बारे में बोलते है उनसे उनके खुद के नेगेटिव व्यू का पता चलता है कि वे दुनिया को किस नज़र से देखते है. प्रोएक्टिव होने का मतलब ये भी है कि आप किसी भी बुरी सिचुएशन से अफेक्ट ना हो. फिर चाहे मौसम खराब हो या ट्रेफिक लेकिन एक प्रोएक्टिव इंसान को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

उसकी जिंदगी में बुरा वक्त या गरीबी आये मगर वो हर हाल में खुश रहेगा. एक प्रोएक्टिव इंसान बुरे से बुरे हालत में भी बगैर कोई कम्प्लेन किये अपना काम करता रहेगा. प्रोएक्टिव का उल्टा रीएक्टिव होता है. और जो लोग रीएक्टिव होते है वो अपने एन्वायरमेंट से बहुत जल्दी अफेक्ट हो जाते है. अगर उनके साथ कुछ बुरा होता है तो वो खुद भी नेगेटिव बन जाते है | एक बार लेखक स्टीफन कोवी जब सेक्रामेन्टो में एक लेक्चर दे रहे थे तब अचानक भीड़ में से एक औरत खड़ी हुई. वो बड़ी एक्साइटेड होकर कुछ बोल रही थी कि तभी उसकी नज़र लोगो पर पड़ी जो उसे घूर रहे थे. लोगो को ऐसे घूरते देखकर वो औरत वापस बैठ गई. अपना लेक्चर खत्म करने के बाद स्टीफन कोवी उस औरत के पास गए.

उन्हें मालूम पड़ा कि वो औरत दरअसल एक नर्स थी और एक बड़े बीमार पेशेंट की फुल टाइम देखभाल कर रही थी. उसका वो पेशंट हर टाइम उस पर चिल्लाता रहता था. उसकी नज़र में वो सब कुछ गलत करती थी. उसने कभी भी उस नर्स को थैंक यू तक नहीं बोला था. इन सब बातों की वजह से वो औरत बड़ी दुखी रहती थी. वो अपनी जॉब से बिलकुल भी खुश नहीं थी. उस दिन स्टीफन कोवी के लेक्चर का सब्जेक्ट भी प्रोएक्टीवीटी ही था. कोवी एक्सप्लेन कर रहे थे कि अगर तुम प्रोएक्टिव हो तो कोई भी चीज़ तुम्हे हर्ट नहीं कर सकती जब तक आप खुद ना चाहे तब तक कोई आपको दुखी नहीं कर सकता. ये लेक्चर सुनकर वो औरत एक्साइटेड हो गयी थी क्योंकि उसे पता चल गया था कि रिस्पोंड करना या ना करना उसके हाथ में है.

उसने कोवी को बताया" मैंने दुखी होना खुद चुना था मगर अब मुझे रिलायिज हो गया है कि दुखी या सुखी होना मेरे हाथ में है लेकिन अब किसी दुसरे इंसान का बिहेवियर मुझे कंट्रोल नहीं कर सकता. एक रिएकटिव इन्सान का मूड TV की तरह होता है जिसका रिमोट कन्ट्रोल दुनिया के हाथ में है। जब भी कोई चाहेगा वो उस रिएक्टिव इन्सान का मूड चेंच कर सकता है। लेकिन एक प्रोडक्टिव इन्सान वो है जिसने अपने मूड का रिमोट कन्ट्रोल अपने पास रखा है। एक प्रोडक्टिव इन्सान को कोई फर्क नही पडता कि दूसरा इन्सान उसके बारे में क्या सोच या बोल रहा है।

हैबिट 2

Begin with the end in mind 


आपकी लाइफ की सबसे ज़रूरी चीज़ क्या है? अपने माइंड में एंड को लेकर शुरुवात से हमारा मतलब है कि आपके सारे एक्शन आपकी वेल्यूज़, आपके पर्पज से मैच होने चाहिए. आपक फाईनल गोल / आपका डेस्टिनेशन पता होना चाहिए ताकि आपका हर स्टेप उसी तरफ जाए. हम कई बार बहुत सी प्रोब्लेम्स फेस करते है. हमें आये दिन किसी ना किसी चीज़ के लिए कंसर्न होना पड़ता है. और लाइफ में इतने चेलेन्जेस है कि हम कई बार भूल जाते है कि हमारे लिए सबसे ज़रूरी चीज़ क्या है. जैसे कि आपको अपने बच्चो का ध्यान रखना पड़ता है, उन्हें हर चीज़ प्रोवाइड करानी पड़ती है.

लेकिन आप इसके लिए इतना ज्यादा हार्ड वर्क करते है कि उनके साथ टाइम स्पेंड ही नहीं कर पाते. आप ये भूल जाते है कि मेटेरियल चीजों से ज्यादा उन्हें आपके प्यार और सपोर्ट की भी ज़रुरत है. अगर आप सच में अपने बच्चो से प्यार करते है तो उन्हें हर दिन शो कराये कि आप उन्हें कितना चाहते है. आपकी बातो और आपके एक्शन में उनके लिए प्यार झलकना चाहिए. और आपका यही बेहेवियर आपके पेरेंट्स और उन बाकी लोगो के साथ भी होना चाहिए जो आपकी लाइफ में बहुत मायने रखते है. बिगीन विद द एण्ड इन माईन्ड से मतलब है ये जानना कि आपके लिए सबसे वेल्युब्ल क्या है. वो आपके अपने लोग हो सकते है, या फिर आपके प्रिंसिपल जिन पर आपको पूरा यकीन है.

अगर आप कुछ ऐसा करते है जो आपके प्रिंसिपल से मैच नहीं करता तो आप एक इनइफेक्टिव इंसान बन रहे है.. मान लीजिये कि आप एक घर बना रहे है. मगर इसके लिए सबसे पहले आपको अपने दिमाग में प्लानिंग करनी पड़ेगी फिर जाकर आप टूल्स लेंगे. अगर आपके घर में बच्चे है तो आपके घर का हर कोना चाइल्ड फ्रेंडली होना चाहिये. अगर आप कुकिंग का शौक रखते है तो आपको अपनी किचन अपग्रेड रखनी पड़ेगी. तो किसी भी काम को शुरू करने से पहले उसका ब्लू प्रिंट आपके दिमाग में क्लियर होना चाहिए. अगर आपने अपना घर अच्छे से प्लान नहीं किया है तो इसे प्रोप्रली कन्सटरकट करना मुश्किल हो जाएगा. और लास्ट में आपको इसे रिपेयर कराने में फ़ालतू पैसे ही खर्च करने पढ़ेंगे.

लाइफ में हर चीज़ प्लानिंग मांगती है.. और इसी तरह एंड को माइंड में रखकर चलने की शुरुवात होती है. ये सोचे कि आपको सबसे पहले क्या करना है. और ये श्योर कर ले कि वो आपके वेल्यूज़ के साथ फिट हो सके. क्या आप सबसे ज्यादा आनेस्टी को वेल्यु करते है? या फिर आप रीस्पेक्ट की ज्यादा वेल्यु करते है ? इसी को ध्यान में रखते हुए अपने दिन की शुरुवात करे.. अपने वेल्यूज़ पर पूरा यकीन रखे. ताकि आपकी लाइफ में जो भी चेलेन्जेस आये आप अपने वेल्यूज़ के हिसाब से उन चेलेन्जेस को फेस कर सके.

हेबिट 3

सबसे पहले ज़रूरी चीज़े करे. 

सबसे पहले ज़रूरी कामो को करने का मतलब सिर्फ टाइम मेनेजमेंट से नहीं है. ये सेल्फ मेनेजमेंट भी है. इंसान होने के नाते हम सब सेल्फ अवेयर होते है. और यही चीज़ हमें सारी लिविंग थिंग्स में सुपीरियर बनाती है. क्योंकि सिर्फ हम इंसान ही खुद को इवेयुलेट कर सकते है और जब हमें लगता है कि हम कुछ गलत कर रहे है तो हम उसे चेंज कर सकते है. जब हमें बहुत से काम करने होते है तो सबसे पहले हमें अपनी प्रायोरिटीज़ सेट करनी चाहिए. कुछ लोगो प्लानर्स की हेल्प लेते है ताकि उन्हें याद रहे. कुछ लोग टू ड्डू लिस्ट और बोर्ड्स बनाते है ताकि उन्हें ज़रूरी काम याद रहे. लेकिन बावजूद इन सबके कई बार हम अपने बेहद ज़रूरी काम टाइम पर कम्प्लीट नहीं कर पाते है.

जब आपकी प्रायोरीटीज़ पूरी नहीं हो पाती तो सेल्फ • डिसिप्लिन आपकी प्रॉब्लम नहीं है. असली प्रॉब्लम ये है कि आपने अपनी प्रायोरीटीज़ को दिल दिमाग में बिठाया ही नहीं. आपने ये सोचा ही नहीं की ये आपकी टॉप प्रायोरीटीज़ क्यों है? क्यों ये आपके लिए इम्पोटेंट है ? सोचिये ज़रा इसके बारे में. ये आपको और ज्यादा मोटिवेट करेगा. "टाइम मेनेज करना चेलेंज नहीं है बल्कि खुद को मेनेज करना है" सबसे पहले ज़रूरी चीज़े करे " इस बात का मतलब है कि अपनी प्रायोरीटीज़ को पहले नम्बर पे रखे. इसका मतलब ये भी है कि ज़रुरत पड़ने पर आप "ना" बोलना सीखे. जब आपके पास करने के लिए ढेर सारा काम हो तो उन टास्क को ना बोल दीजिये जो आपकी प्रायोरीटीज़ का हिस्सा नहीं है.

एक्जाम्प्ल के लिए सेंड्रा को एक कम्युनिटी प्रोजेक्ट का चेयरमेन बनने को बोला गया. मगर उसके पास पहले से ही इम्पोटेंट टास्क थे मगर प्रेशर में आकर उसे हाँ बोलना पड़ा. सेंड्रा ने अपने पडोसी कोंनी को पूछा कि क्या वो भी इस प्रोजेक्ट को ज्वाइन करना चाहेगी. सेंड्रा की बात सुनकर कोनी ने कहा" सेंड्रा, ये प्रोजेक्ट काफी मजेदार लगता है... मगर कुछ रीजन्स से मैं इसमें पार्टिसिपेट नहीं कर पाऊँगी मगर सच में तुम्हारे इस इनविटेशन को मै एप्रिशिएट करती हूँ.

उसके बाद सेंड्रा को लगा कि जैसा कोनी ने किया उसे भी वही करना चाहिए था. वो भी तो पोलाईटली "ना" बोल सकती थी जब उसे चेयरमेन बनने के लिए बोला गया था. ये प्रोजेक्ट कम्यूनिटी के लिए अच्छा था मगर कोनी को अपनी टॉप प्रायोरीटीज़ मालूम थी इसलिए उसने ना बोला. उसके पास करने के लिए दुसरे ज़रूरी काम थे. और इसलिए उसने पोलाईटली ना बोलने की हिम्मत की. अगर आप अपनी प्रायोरीटीज अपने दिल और दिमाग में अच्छे से प्लान कर लेंगे तो आपके लिए बाकी चीजों को ना कहना आसान रहेगा. और आप अपने ज़रूरी कामो को आसानी से टाइम पर पूरा भी कर पायेंगे. सेल्फ डिस्प्लीन से ज्यादा ज़रूरी है कि आपके पास विल पॉवर हो जिससे आप ज़रूरी कामो को सबसे पहले निपटा सके.

हेबिट 4
थिंक विन विन 


विन विन एक ऐसा सोल्यूशन है जो आपको और उन लोगो को जिनसे आप इंटरेक्ट करते है, काफी बेनिफिट देगा. जब भी आपका अपनी फेमिली और कलीग्स के साथ कोई इस्यु होता है तो उसका कोई सोल्यूशन निकालना ही पड़ता है जिससे सबका भला हो. विन विन बेस्ट सोल्यूशन है. अगर कोई जीतता है और दूसरा हारता है तो इससे एक लम्बा और मज़बूत रिलेशन नहीं बन पायेगा. इमेजिन करो कि आपका अपने कलीग से डिसएग्रीमेंट हो जाता है तो आपको ये करना है कि जो भी प्रॉब्लम है उस पर खुलकर बात करनी है. उसका कोई ऐसा सोल्यूशन निकाले जो आप दोनों के लिए सही हो. लेकिन अपने कलीग को खुद पर हावी ना होने दे ना ही आप उस पर हावी हो. आप दोनों का रिश्ता बेलेंस होना चाहिए जिसमे दोनों की जीत हो.

इस तरह से आपके और आपके कलीग में को ओपरेशन रहेगा जिससे आप एक टीम की तरह काम कर सकते है. एक दुसरे के साथ कम्पटीट करने से ये कहीं ज्यादा अच्छा है. अब इमेजिन करे कि आप बॉस हो और अपने किसी एम्प्लोयी से आपका डिसएग्रीमेंट होता है। तो जाहिर सी बात है कि आपकी ही बात ऊपर रहेगी क्योंकि आपका एम्प्लोयी अपनी जॉब की वजह आपके सामने चुप ही रहेगा. एक बॉस होने के नाते आप बेशक आर्ग्युमेंट में उससे जीत जाए मगर लॉन्ग रन में देखे तो ये आपकी हार होगी. क्योंकि अपने एम्प्लोयीज़ को नीचा दिखाकर आप उन्हें मोटिवेट नहीं कर सकते. चो आपके लिए काम तो करेगा मगर मन मार के. तो कुल मिलाकर नुक्सान तो आपका ही हुआ.

कम्प्रोमाईज़ करना हमेशा अच्छा होता है फिर भले ही आप बॉस ही क्यों ना हो. आपके लिए यही अच्छा होगा कि आप अपनी पोजीशन का इस्तेमाल ना करे. अपने एम्प्लोयीज़ को खुश रखने में ही आपका ज्यादा फायदा है. अगर आप हमेशा विन विन सिचुएशन सेटल करते है तो आपके एम्प्लोयीज़ ज्यादा इफेक्टिव होंगे. और ये आपकी कंपनी के लिए भी फायदेमंद होगा, साथ ही आपको बार-बार लोगो को हायर करके उन्हें ट्रेन करने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी. विन विन सिचुएशन सिर्फ वर्क प्लेस पर ही अप्लाई नहीं होती. ये हर तरह के रिलेशनशिप में एप्लीकेबल है. जब भी आपके अपने पार्टनर, आपके बच्चों, दोस्त या पड़ोसियों के साथ डिसएग्रीमेंट हो तो विन विन सिचुएशन के बारे में सोचे... फिर आप देख्नेगे कि कैसे आपके हर रीलेशन में और भी ज्यादा प्यार और ट्रस्ट आएगा.

हैबिट 5


पहले खुद दुसरो को समझने की कोशिश करे फिर दुसरो से उम्मीद करे कि वे आपकी बात समझे क्या आपको याद है कि लास्ट बार कब किसी ने आपसे अपनी प्रॉब्लम शेयर की थी ? और क्या आपने उनकी बात सच में सुनी भी थी ? क्या आपने एडवाइस देने से पहले उनकी फीलिंग्स को समझा था ? पहले आप दुसरो को समझने की कोशश करे फिर उनसे उम्मीद करे कि वो आपकी बात समझे, ये अच्छे कम्युनिकेशन का यही तरीका है. हम अपनी राइटिंग, रीडिंग स्पीकिंग और लिसनिंग के ज़रिये कम्युनिकेट करते है. बचपन में हम लिखना, पढना और बोलना सीखने में सालो लगा देते है. लेकिन किसी की बात सही ढंग से सुनने के लिए ऐसी कोई ट्रेनिंग नहीं है. किसी के साथ कम्युनिकेट करने का सबसे बेस्ट तरीका ये है कि पहले हम ये समझने की कोशिश करे कि आखिर वे कहना क्या चाहते है.


गुड लिसनिंग वो होती है जब आप खुद को सामने वाले की सिचुएशन में रखकर सोचते है. तभी आप सही तरीके से समझ पायेंगे कि वो इंसान कहना क्या चाहता है. जब आप सुनते नहीं है तो आप उस इंसान की बात समझे बगैर रिप्लाई करने लगते है मगर जब आप समझने की कोशीश करते है तभी आपको पता चलता है कि वो इंसान असल में कैसा फील कर रहा है. और जब आप इस तरीके से किसी की बात सुनेंगे तभी जाकर उस इंसान को कोई अच्छी एडवाईस दे पायेंगे या उनकी सच में कोई हेल्प कर पायेंगे.

एक बार एक आदमी किसी ऑप्टोमेटरिस्ट के पास गया. उसको कुछ विजन की प्रॉब्लम हो गयी थी. उस आदमी ने ऑप्टोमेटरिस्टको बताया कि उसको क्लीयरली कुछ दिखाई नहीं दे रहा है. तो उस ऑप्टोमेटरिस्ट ने क्या किया कि उसने उस आदमी को अपना चश्मा दे दिया ऑप्टोमेटरिस्ट ने कहा " इन्हें पहनो, मैं पिछले 10 सालो से यही चश्मा पहनता आया हूँ और मुझे साफ़ दिखता है मेरे पास एक जोड़ी एक्स्ट्रा पेयर घर पे रखा है तो तुम ये वाले पहन लो". उस आदमी ने ऑप्टोमेटरिस्टकी बात मानकर वो चश्मा पहन लिए मगर कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि उसे और भी धुंधला काशशा के बावजूद उस आप्टामटारस्ट के चश्मा पहन के उसे कुछ भी साफ नहीं दिख रहा था. अब ऑप्टोमेटरिस्ट ने उससे कहा कि वो पोजिटिव सोचे. इस पर उस आदमी ने जवाब दिया" ओके, अब भी मुझे पोजिटिवली कुछ साफ़ नहीं दिखाई दे रहा" ये बात सुनकर ऑप्टोमेटरिस्ट अपसेट हो गया. क्योंकि आखिरकार वो तो उस आदमी की बस मदद करना चाहता था. उसे लगा कि शायद वो आदमी झूठ बोल रहा है और अनग्रेटफुल है.

हम भी कई बार ठीक इसी तरह उस ऑप्टोमेटरिस्ट के जैसे ही बीहेव करते है. हम यही कहते रहते है कि "अगर मैं तुम्हारी जगह होता" या "मेरी बात मान के देखो" लेकिन हम कभी भी ये ट्राई नहीं करते कि वो आदमी वाकई में कैसा फील कर रहा है और इसका रिजल्ट ये निकलता है कि वो इंसान हम पर कभी यकीन नहीं करेगा. और ना ही कभी दुबारा हमारे पास अपनी प्रॉब्लम लेकर आएगा. अगर आप सच में किसी की हेल्प करना चाहते है तो सबसे पहले उन्हें समझने की कोशिश करे. ऐसा करके आप उनका ट्रस्ट जीत सकते हैं. और उन्हें यकीन हो जाएगा कि आपके एक्शन के पीछे कोई मोटिव नहीं नहीं बस हेल्प करने की इच्छा है. वो फिर वो भी आपको समझना शुरू कर देंगे.

हैबिट 6
सिनर्रजाइज़


सिनेर्जी का मतलब है "द होल इज ग्रेटर दन द सम आफ इटस पार्टस" "the whole is greater than the sum of its parts" यानि जब एक आदमी दुसरे की मदद करता है तो दोनों साथ मिलकर बहुत कुछ अक्म्प्लिश कर सकते है. जब एक टीम का मेम्बर दुसरे टीम मेम्बर के साथ मिल के काम करता है तो वो दोनो मिल कर अकेले इन्सान के मुकाबले बहुत ज्यादा अचीव कर सकते हैं। जब भी कोई नेचुरल डिजास्टर या कालामेटी जैसे आग, टाईफून या अर्थक्वेक होता है तो लोग सिनर्रजाइज़ होते है यानि साथ मिलकर काम करते वो मुसीबत में पड़े लोगो को मदद करने के लिए आगे आते है. तब लोग अपने डिफरेंसेस भूल जाते है. मुश्किल सिचवेशन लोगो के अंदर कोपरेट करने की फीलिंग्स ले आती है. और सब तुरंत मिल जुल कर सर्वाइव करने के लिए करते है.

सिनेर्जी के मतलब को ओपरेट या कोलाब्रेशन भी है. इसका मतलब साथ मिलकर चलना और कम्बाइनड एफरट भी है. चाहे कोई भी ग्रुप हो, अगर आपस में सिनर्जी होगी तो इसका बेनिफिट ज़रूर मिलेगा. लेकिन प्रॉब्लम तो ये है कि ये सिनर्जी हमारी लाइफ में हर रोज़ नहीं होती. लोग आपस में अपने डिफरेंसेस दूर करना ही नहीं चाहते. उन्हें ये बड़ा मुश्किल लगता है. क्योंकि हर किसी का एक डिफरेंट पॉइंट ऑफ़ व्यू होता है, डिफरेंट वे ऑफ़ चिंकिंग होती है. हम इस दुनिया को अलग नज़र से देखते है क्योंकि हम अपने खुद के हिसाब से ये दुनिया देखते है. हमें ये समझना ही होगा कि दुनिया को देखने का हमारा नजरिया लिमिटेड होता है इसीलिए हमारी सोच भी लिमिटेड हो जाती है.

हमें दुसरे लोगो को जानने और उनके एक्स्पीरिटेंश को समझने की ख़ास ज़रूरत है. ये किसी ओप्टीकल इल्यूजन की तरह है.. हो सकता है कि जो मुझे एक यंग लेडी नज़र आ रही है वही आपको एक बूढी औरत दिखाई दे हम दोनों ही उस इमेज को डिफरेंटली इंटरप्रेट कर रहे है हालाँकि हम दोनों ही अपनी जगह सही है. तो इस बात पर बहस करने का कोई फायदा नहीं है. सिनर्रजाइज़ करने के लिए हमें एक दुसरे के पॉइंट ऑफ़ व्यू को समझना ही पड़ेगा. और इस तरीके से हम एक बड़ी पिक्चर देख सकते है.

सिनर्जी का मतलब है कोओपरेशन. इसका मतलब है अपने डिफरेंसेस को एक्सेप्ट करना और एक दुसरे के विचारों की कद्र करना. ये कभी साबित करने की कोशिश ना करे कि बस आप सही है और दूसरा बाँदा गलत है. उस इंसान के नज़रिए से भी समझने की कोशिश करे. इससे आपकी नॉलेज ही बढ़ेगी और कोई नुक्सान नहीं होगा. बहसबाजी करने से बेहतर और भी कई आल्टरनेट है. जब आप दुसरो के व्यूज़ की रीस्पेक्ट करने लगते है तो आप उनके साथ मिलकर काम कर सकते है. आप कोपरेट करके मिलकर काम करने से कई सारी नई ओर अच्छी चीज़े क्रियेट कर सकते है.



हैबिट 7
शार्पन द सॉ


शार्पन द सॉ से हमारा मतलब है कि अपने सबसे बड़े एस्सेट को शार्पन करे. यानि हमेशा कुछ नया सीखते रहे और आपका सबसे बड़ा एस्सेट आप खुद है. आपको रेगुलरली खुद को रीन्यू करना पड़ेगा. अपनी लाइफ के हर एस्पेक्ट में आपको इमप्रूव करना पड़ेगा मतलब फिजिकली, स्प्रिच्यूली, मेंटली. सोशली और इमोशनली. आप रेगुलर एक्सरसाइज से खुद को रीन्यू रख सकते है. इसके लिए ज़रूरी नहीं कि आप जिम जाए या फिर महंगे इकुपमेंट ही खरीदे. आप घर पे ही सिम्पल एक्सरसाइज कर सकते है. आप रन कर सकते है, जोगिंग कर सकते है या फिर रेपिड वाक ले सकते है. अगर आप एक्सरसाइज नहीं करना चाहते तो स्लो तरीके की कोई भी एक्टिविटी कर सकते है और फिर आप देखेंगे कि डे बाई डे आपकी बॉडी इम्प्रूव हो रही है.

इसी तरह आप अपनी स्पिरिट को भी रीन्यू करने की ज़रूरत है. ऐसा कई बार होता है जब आप खुद को पूरी तरह थका हुआ पाते है. रोज़मर्रा के चेलेन्जेस से हम बेहद थक जाते है. तो हमें खुद को इंस्पायर रखने की बेहद ज़रूरत है. और आप प्रेयिंग, म्युज़िक, बुक रीडिंग करके या फिर नेचर के साथ जुड़कर खुद को इंस्पायर कर सकते है. ये आप पर डिपेंड है कि आपकी स्पिरिट किस तरीके से अच्छा फील करेगी. कभी कभी एक ब्रेक लेना भी ज़रूरी होता है ताकि आप खुद को टाइम दे सके और अपने बारे में सोच सके. हम जब यंग होते है तो हमारा दिमाग खुद ही अपनी एक्सरसाइज कर लेता है लेकिन एक बार स्कूल खत्म करने के बाद हम शायद ही कोई बुक पढने का टाइम निकाल पाते हो या कुछ नया सीखते hai? लेकिन लर्निंग सिर्फ स्कूल तक ही लिमिट नहीं होनी चाहिए.

हम इसके बाद भी खुद को एजुकेट करने के तरीके ढूंढ सकते है. अपने डेली रूटीन के कामो से हटकर कुछ अलग चीज़े ट्राई करे. खुद को चेलेंज करे कि आप कम से कम हर महीने एक बुक पूरी पढ़ सके. और जो लोग बहुत बिजी है और बुक नही पढ़ सकते उनके लिये हमने Hindi Book Reader बनायी है। हमारे सोशल और इमोशनल एस्पेक्ट एक दुसरे के साथ क्लोज़ली जुड़े होते है. ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे इमोशन लोगो के साथ इन्टरेकट करने से ही पैदा होते है. हर दिन हमें दुसरो के साथ अपने रिलेशन इम्प्रूव करने का मौका मिलता है. तभी तो कहा गया है कि "अर्न योर नेगवोयर लव" यानि अपने पड़ोसियों से प्यार करे. अगर आप एक काइंड नेचर पर्सन है तो यकीन मानिए आप एक लंबी खुशहाल लाइफ जियेंगे.

अब इमेजिन करे कि जैसे आप जंगल में वाक पर गए हो, आपको एक आदमी नज़र आता है जो एक छोटे से पेड़ को काट रहा है. आप देखते है कि वो आदमी काफी थक गया है तो आप उससे पूछते है कि वो कितनी देर से ऐसा कर रहा है. वो आदमी कहता है" पांच घंटे हो गए है और में अब थककर चूर हो गया हूँ! ये बड़ी मेहनत वाला काम है" तो आप उस आदमी को सलाह देंगे कि उसे कुछ मिनट का ब्रेक लेना चाहिए. हो सकता है कि उसे अपना सॉ यानि अपनी आरी को शार्पन करने की ज़रूरत है. और आप उसे ये भी कहते है कि " " मुझे यकीन है कि इससे आपका काम तेज़ी से होगा" मगर वो आदमी मना कर देता है. वो कहता है कि वो इतना बिजी है कि उसके पास सा शार्प करने का यानी अपनी आरी को तेज करने टाइम ही नहीं है.

अब किसी भी चीज़ को इफेक्टिवली कट करने के सॉ यानि आरी को तेज़ करने की ज़रुरत होती है ठीक इसी तरह खुद को और भी इफेक्टिव बनाने के लिए हमें भी अपने एस्सेट शार्पन करने होंगे. आपको टाइम निकाल कर खुद को रीन्यू करना ही पड़ेगा. क्योंकि जो टूल आपकी लाइफ में ज़रूरी है वो तो आपके पास है ही बस उनको शार्पन करने की ज़रुरत बीच बीच में पड़ती रहती है. और आपके एस्सेट्स है आपकी बॉडी, माइंड और सोल और उन्हें शार्पन करना कभी ना भूले.

कन्क्लुज़न् 


आपने हाइली इफेक्टिव लोगो को 7 हैबिट्स सीखी. 
हैबिट नंबर 1 है प्रोएक्टिव बने 
हैबिट नंबर 2 है एंड को ध्यान में रखकर किसी भी काम की शुरुवात करे. 
हैबिट नंबर 3 है कि सबसे पहले ज़रूरी चीजों को प्रायोरिटी दे. हैबिट नंबर 4 है विन विन सिचुएशन सोचे 
हैबिट नंबर 5 है कि अपनी बात समझाने के बजाये पहले दुसरो की बात समझने की कोशिश करे. 
हैबिट नंबर 6 है सिनेज़ईज़ और लास्ट में 
हैबिट नंबर 7 है अपने एस्सेस्ट्स शार्पन करे, 
हैबिट नंबर 1, 2 और 3 आपको अपना केरेक्टर इम्प्रूव करने में मदद करेंगे. 
हैबिट नंबर 5 और 6 दुसरो के साथ आपके रीलेशन इम्प्रूव करेंगे. और लास्ट में हैबिट नंबर 7 से आप अपनी ये अच्छी क्वालिटी लाइफ टाइम तक मेंटेन करके रख सकते है.

अब जो भी आपने सीखा है उसे डेली लाइफ में अप्लाई करना सीखे. जब कभी भी आप किसी बुरी सिचुएशन में होते है तो प्रोएक्टिव बनने की कोशिश करे. जब भी आपका किसी के साथ कौंफ्लिक्ट होता है तो विन विन सिचुएशन चुने. और जब आप कोई चीज़ बार-बार करेंगे तभी वो आपकी हैबिट बन पायेगा. जैसा कि एरिस्टो ने कहा है" हम वही बनते है जो हम बार-बार लगातार करते है. तो एक्सीलेंस कोई एक्ट नहीं है बल्कि हैबिट से आती है". तो दोस्तो इसी के साथ ये समरी यहाँ पर खतम होती है। आप रिव्यू सेक्शन में हमें लिख कर बता सकते है कि आपको ये समरी कैसी लगी और अगली समरी आप किस बुक पर चाहेंगे। अगर आपको हमारी मेहनत पसन्द आयी तो आप हमें अपना प्यार दिखा सकते है  "जय हिन्द "




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The Psychology Of Money Book Summary In Hindi Introduction


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The Psychology of Money
By Morgan Housel



विषय - सूची

प्रस्तावना: पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन
1. कोई भी मूर्ख नहीं है 
2. भाग्य और जोखिम
3. कभी भी पर्याप्त नहीं 
4. विस्मयकारी कंपाउंडिंग
5. धनवान बनना बनाम धनवान बने रहना
6. पट, आप जीते
7 स्वतंत्रता
8. कार में बैठे आदमी का विरोधाभास
9. संपत्ति वह है जो आपको दिखाई नहीं देती
10 धन-संपत्ति की बचत करें
11. यथोचित तर्कशील 
12. अप्रत्याशित!
13. त्रुटि के लिये जगह
14. आप बदलेंगे
15. कुछ भी मुफ्त नहीं होता
16. आप और मैं
17. निराशावाद का बहकावा 
18. जब आप कुछ भी मान लेंगे
19. अब सब साथ में 
20. स्वीकारोक्तियाँ


                            प्रस्तावना

                     पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन


मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई-फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरू करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था ।


धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा ।

वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, खासकर जब वह नशे में धुत होता ।


एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, “गली में जो जवाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और $1000 के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।"


एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को कंकरों की तरह उछालते, और फिर किसका सिक्का सबसे दूर गया, इस बात पर बहस करते और ठहाके मार कर हँसते। सिर्फ़ मनोरंजन के लिये। कुछ दिनों बाद उसने होटल के रेस्त्रां में एक लैंप तोड़ दिया।


एक मैनेजर ने उससे कहा कि वह $500 का लैंप था और उसे उसकी भरपाई करनी होगी। "तुम्हें $500 चाहिये?” कार्यकारी ने अविश्वासपूर्वक पूछा और जेब से नोटों की एक गड्डी निकाल कर मैनेजर को देते हुए कहा, "ये रहे पाँच हज़ार डॉलर। अब मेरे सामने से दफ़ा हो जाओ। और फिर कभी भी दोबारा इस तरह मेरी बेइज़्ज़ती मत करना। "


आप सोच रहे होंगे कि आख़िर इस तरह का व्यवहार कब तक चल सकता था, और इसका जवाब है "ज़्यादा दिन नहीं। कई वर्षों बाद मुझे पता चला कि वह दिवालिया हो गया।


इस किताब का आधार यह है कि धन-संपत्ति के मामले में आप कितना अच्छा प्रबंधन करते हैं, यह इस पर कम निर्भर करता है कि आप कितने होशियार हैं और इस पर ज़्यादा कि आपका व्यवहार कैसा है और व्यवहार सिखाना कठिन कार्य है, उन्हें भी जो वास्तव में होशियार हैं।


एक प्रतिभाशाली व्यक्ति, जो अपनी भावनाओं का नियंत्रण खो दे, एक वित्तीय आपदा हो सकता है। इसका विपरीत भी उतना ही सत्य है सामन्य व्यक्ति जिन्हें वित्तीय ज्ञान नहीं हैं, धनी हो सकते हैं अगर उनके पास कुछ ऐसे व्यावहारिक कौशल हों जिनके लिये बुद्धिमत्ता की औपचारिक युक्तियों की आवश्यकता नहीं होती।


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The alchemist book summary in hindi (द अल्कमिस्ट बुक समरी इन हिन्दी)


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About Book

अलकेमिस्ट सेंटियागो नाम के एक लड़के की कहानी है जो अपनी पर्सनल लेजेंड (अपनी डेस्टिनी ) को हासिल करना चाहता है. वो दूर-दूर के जगहों की यात्रा करता है और अलग अलग तरह के लोगों से मिलता है. अंत में, सैंटियागो को समझ में आता है कि वो जो खजाना ढूंढ रहा है, वह उसके अंदर ही है. अगर आपका कोई ऐसा सपना है जो आप पाना चाहते हैं, तो ये बुक आपके लिए है. आप इसमें कई लेसन सीखेंगे जो आपकी जर्नी में आपकी मदद करेंगे.


यह बुक किसे पढनी चाहिए

सभी ऐज और प्रोफेशन के लोगों के लिए, स्टूडेंट्स, एम्प्लॉईज़, मदर्स, जो रिटायर हो चुके उनके लिए


ऑथर के बारे में 

पाउलो कोएहलो इंटरनेशनल बेस्ट सेल्लिंग बुक के ऑथर हैं. वो चार दशकों से नॉवेल लिख रहे हैं. उनकी कहानियां ज्ञान, इंस्पिरेशन और यादगार पात्रों से भरी हुई है.



द अल्केमिस्ट पार्ट 1.

ये स्टोरी एक शेपहर्ड लड़के की है जिसका नाम सेंटीयागो था. वो स्पेन के एंडाल्यूसिया में रहता था और भेड़े चराता था. एक बार वो अपनी शीप्स चराते हुए किसी जगह पर पहुंचा जहाँ एक शॉपकीपर की काले बालो वाली सुंदर लड़की से उसकी मुलाकात हुई जो उससे उन खरीदने आती थी. सेंटीयागो को वो लड़की बड़ी अच्छी लगती थी और हर बार की तरह इस साल भी वो उस लड़की से मिलने की उम्मीद में उसी जगह पर वापस जाने की सोच रहा था. वो स्पेन के हिंटरलैंड एरिया में अपनी शीप्स लेके घूमता था जहाँ घास और पानी की कोई कमी नहीं थी.


रात में ठंड से बचने के लिए वो एक जैकेट रखता था लेकिन दिन में बड़ी गर्मी होती थी इसलिए उसे जैकेट लेके घूमना पसंद नहीं था. "लेकिन लाइफ में किसी भी चेंज के लिए रेडी रहना चाहिए, चाहे दिन हो या रात या लाइफ में बड़ी चीज़े" ये खुद बात से कहा करता था क्योंकि जैकेट उसे रात में ठंड से बचाती थी. उस लड़के की फेमिली चाहती थी कि वो एक प्रीस्ट बने लेकिन उस लड़के को ट्रेवल करने का बड़ा शौक था इसलिए वो एक शीपहर्ड बन गया ताकि वो अपनी शीप्स के साथ हमेशा घूमता रहे. उसे एक ही ड्रीम दो बार आया जब रात में वो एक चर्च के एक टूटे हुए कमरे में सो रहा था जहाँ पर एक बड़ा सा पेड़ उग आया था. फिर वो एक मिस्टिक लेडी से मिलने तारीफा नाम के टाउन में जो ड्रीम्स के मतलब बताती थी.


तो उस जिप्सी औरत ने उस लड़के के ड्रीम का मतलब ये बताया कि उसे ईजिप्ट के पिरामिड जाना चाहिए जहाँ उसे एक खजाना मिलेगा. और जब उसे वो खजाना मिल जाए तो उसका दसंवा हिस्सा फीस के तौर पर वो उस जिप्सी लेडी को दे दे. लेकिन उस लड़के ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और टाउन में घूमने लगा. फिर उसे एक ओल्ड मेन मिला. पहले तो सेंटीयागो उससे बात करने में ज़रा भी इंटरेस्ट नहीं था लेकिन उस ओल्ड मेन की विजडम ने उसे इम्प्रेस कर दिया और वे दोनों बाते करने लगे. उस ओल्ड मेन ने बताया कि वो सालेम का राजा है. उसने सेंटीयागो को अपने ड्रीम यानी खजाने तक पहुँचने में हेल्प भी की. उसने सेंटियागो को ये भी बताया कि वो अक्सर लोगो को उनकी डेस्टिनी तक पहुँचने में किसी ना किसी तरह से हेल्प करता है.


अब क्योंकि सेंटियागो ने अपनी डेस्टिनी तक पहुँचने से पहले ही हार मान ली थी इसलिए वो उसे सही रास्ता दिखाने के लिए उसके पास आया था. उस ओल्ड मेन ने उससे कहा कि लाइफ हमेशा हमें कुछ साइन या क्ल्यूज़ देती है ताकि हम राईट डायरेक्शन चूज़ कर सके. फिर उसने सेंटियागो से कहा कि उसे बाकि की गाइडेंस लेसन के लिए फीस के तौर पे अपनी शीप्स का दसवा हिस्सा देना होगा. अगले दिन सेंटियागो फिक्स टाइम पर उस ओल्ड मेन से मिला जिसने उसे दो स्टोंस यानी पत्थर दिए. इनमे से एक स्टोन ब्लैक था और दूसरा व्हाईट. उस ओल्ड मेन ने सेंटियागो से कहा कि अपनी मंजिल की तलाश में अगर उसे कभी भी कोई कन्फ्यूजन हो तो इन दोनों स्टोंस की हेल्प से वो अपना डिसीज़न ले सकता है.


उसने उसे ये भी एडवाइस दी कि अगर उसे कोई गुड ओमेन दिखे तो ध्यान रखे जो उसे उसकी डेस्टिनी तक पहुँचने में हेल्प करेंगे. तभी अचानक एक बटरफ्लाई सेंटियागो के फेस के उपर से उडी जोकि एक गुड ओमेन था. और फिर उसी दिन वो लड़का एफ्रिका के टंगीयर नाम की जगह पहुंचा. वहां पर वो एक बार में बैठा था कि एक आदमी उसके पास आया. उस आदमी में स्पेनिश में उससे पुछा कि वो इस नयी जगह में क्या करने आया है. अब उस लड़के के लिए ये एक और ओमेन था. सेंटियागो ने उसे कहा कि उसे पिरामिड्स तक जाना है और अगर वो आदमी गाइड बनाकर उसे वहां तक ले जाए तो वो उसे पैसे देगा. वो आदमी सेंटियागो से पैसे लेकर बिज़ी मार्किट में कहीं गायब हो गया और सेंटियागो देखता रह गया.


वो बड़ा उदास हुआ फिर अचानक उसे वो दो स्टोंस याद आये. जब उसने वो स्टोंस अपनी पॉकेट से निकाले तो उसे उस ओल्ड मेन की बात याद आ गयी. उस ओल्ड मेन ने कहा था" अगर तुम किसी चीज़ को दिल से चाहो तो ये सारी कायनात उसे तुमसे मिलाने में मदद करती हैं" उन दो स्टोंस को देखके सेंटियागो को लगा कि जैसे वो ओल्ड मेन एक स्पिरिट की तरह उसके साथ है और उसे खजाने की खोज में आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर कर रहा है. अपना पैसा खोने के बावजूद सेंटियागो ने हार नहीं मानी और अपने शिपहर्ड के एक्स्पिरियेश से किसी तरह उस अजनबी शहर में सर्वाइव कर लिया. अब उसका सेल्फ बीलीफ़ और कोंफिडेंश और भी स्ट्रोंग हो गया था फिर उसे एक क्रिस्टल सेलर मिला.


सेंटियागो ने उस क्रिस्टल सेलर से कहा कि अगर वो उसे खाना खिला दे तो बदले में वो उसका कुछ काम कर सकता है. उस शॉप कीपर ने उसे लंच कराया और फिर उससे अपनी शॉप में रखी ग्लास की चीज़े साफ़ करने को कहा. जब वो ग्लासवेयर साफ़ कर रहा था तो उसी टाइम शॉप में दो कस्टमर्स ने आकर कुछ सामान खरीदा. अब वो शॉप वाला भी ओमेन में बीलिव करता था तो उसने सेंटियागो को हमेशा के लिए काम पे रख लिया. लेकिन सेंटियागो को वहां काम नहीं करना था, उसे तो पिरामिड्स जाने के लिए पैसो की ज़रूरत थी. उसकी बात सुनकर वो शॉप वाला हंसा और उसने बताया कि पिरामिड्स वहां से हज़ारो किलोमीटर दूर है और वहां तक जाने के लिए ढेर सारा पैसा चाहिए. ये सुनकर सेंटियागो का इरादा बदलने लगा उसने सोचा क्यों ना काम करके इतना पैसा कमाया जाए कि वो वापस अपने नेटिव प्लेस जाकर शीप्स खरीदे और फिर से शिपहर्ड का काम शुरू कर दे.


पार्ट 2.


वो लड़का क्रिस्टल्स के लिए एक नया केबिनेट बनाना चाहता था ताकि वो जल्द से जल्द ढेर सारा पैसा कमा सके और वापस अपने टाउन जाकर शिपहर्ड का काम शुरू कर सके. शॉप कीपर ने उसकी बात मान ली क्योंकि उसे सेंटियागो से सिम्पेथी थी. वो खुद कई सालो से मक्का जाने का ख्वाब देख रहा था लेकिन कभी जा नहीं पाया था तो इसलिए वो चाहता था कि कम से कम सेंटियागो की विश पूरी हो. इसलिए उसने सेंटियागो को एडवाइस दी कि उसे क्रिस्टल के ग्लासों में चाय बेचनी चाहिए जिससे ज्यादा कस्टमर अट्रेक्ट हो सके. हालांकि उसकी शॉप अच्छी चल रही थी और उसे ज्यादा मेहनत करके शॉप को एक्सपेंड करने की कोई जरूरत नहीं थी फिर भी वो सेंटियागो की हेल्प करने के लिए तैयार हो गया.


क्योंकि सेंटियागो की डेस्टिनी में उस शॉप कीपर के इस डिसीज़न का भी कंट्रीब्यूशन था. और इस डिसीज़न से एक बड़ा चेंज आया क्योंकि क्रिस्टल ग्लास में चाय बेचने से ये शॉप बड़ी फेमस हो गयी थी और इसे एक बड़ी कमर्शियल सक्सेस मिली थी. जब सेंटियागो के पास काफी पैसा जमा हो गया तो उसने अपने घर वापस जाने का डिसीजन लिया, लेकिन जाने से पहले वो शॉपकीपर से ब्लेस्सिंग्स लेना चाहता था. शॉप कीपर ने उसे ब्लेस्सिंग दी और साथ ही ये प्रेडिक्ट भी किया कि सेंटियागो वापस स्पेन नहीं जा पायेगा.


सेंटियागो ने अपना सारा सामान समेटा और किंग के दिए दो स्टोंस भी अपनी पॉकेट में रख लिए. जैसे ही वो एंडाल्यूसिया जाने के लिए तैयार हुआ कि तभी उसे एक ख्याल आया. जो कुछ भी अब तक उसके साथ हुआ था, उसने उस सब के बारे में सोचा. उसे अचानक ख्याल आया कि वो जब चाहे अपने देश जाकर शीप्सहर्ड बन सकता है लेकिन पिरामिड्स जाने का मौका उसे दुबारा नहीं मिलेगा. किंग के दिए उन दो स्टोंस को देखकर उसे ये ख्याल आया था. वो अपने डिसीजन पर गौर करने लगा. अब उसने अपना माइंड चेंज कर लिया था और पिरामिड्स जाने के लिए निकल पड़ा. वो एक वेयर हाउस पहुंचा जहाँ उसे एक इंग्लिशमेन मिला जो काफी बातो मे सेंटियागो की तरह था


वो आदमी उन दो स्टॉस को भी पहचानता था जो सेंटियागो के पास थे. ये और ओमेन था सेंटियागो के लिए. फिर वे दोनों ईजिप्ट जाने वाले एक कारवाँ के साथ-साथ चलने लगे जिसका सरदार एक दाड़ी वाला आदमी था. वो कारवाँ एक रेगिस्तान से गुज़र रहा था. कारवाँ में पहले तो काफी चहल पहल हो रही थी लेकिन फिर सब चुपचाप चलने लगे. जर्नी के दौरान सेंटियागो की अपने ऊंट चलाने वाले से दोस्ती हो गयी और दोनों अपनी-अपनी लाइफ के बारे में एक दुसरे को बताने लगे. दोनों को एक फिलोसिफिकल ट्रऊथ का एहसास हुआ. उन्हें फील हुआ कि जैसे डेस्टिनी ने हर चीज़ पहले से प्लान कर रखी है क्योंकि लाइफ में हर एक चीज़ किसी दूसरी चीज़ से जुडी हुई है.


जर्नी के बीच-बीच में उन्हें बेडूइन्स भी मिल जाते थे जोकि डेजर्ट के मिस्टीरियस प्रोटेक्टर ट्राइब थे. वे उन्हें डेजर्ट के डाकुओ और आने वाले खतरों के बारे में अलार्म करके फिर से गायब हो जाते थे. एक बार तो उन्हें ये भी इन्फोर्मेशन मिली कि ट्राइबल्स के बीच में वार होने वाली है जिसे सुनकर सारे लोग डर गए थे लेकिन वापस लौटना अब पोसिबल नहीं था. और जब वापस जाना मुमकिन ना हो तो आगे बढ़ते रहना ही एक पोसिबल रास्ता होता है।


पार्ट 3.


जैसे जैसे वे लोग आगे बढ़ रहे थे, वो इंग्लिशमेन डेजर्ट में और ज्यादा इंटरेस्ट लेता गया और वो लड़का उस इंग्लिशमेन की बुक्स में. तो ये एक तरह का छोटा सा रोल रिवर्सल था. वो इंग्लिशमेन किसी भी मेटल को गोल्ड में चेंज करने के आर्ट यानी कि अल्केमी में इंट्रेस्टेड था. लेकिन सेंटियागो जितना उन बुक्स को पढता गया उतना ही ज्यादा कन्फ्यूज़ होता गया क्योंकि उसे उन बुक्स की लेंगुएज और उनमे बने सिम्बल्स कुछ समझ नहीं आ रहे थे. वो ये सब ईजी वे में सीखना चाहता था लेकिन उस इंग्लिशमेन ने कहा" हायर नॉलेज उसी को मिलती है जो खूब सारा टाइम देकर बड़ी मेहनत से ये किताबे पढ़ते है...


अब उनका कारवाँ तेज़ी से आगे बढ़ता जा रहा था और वे लोग ट्राइबल वार से बचने के लिए रात-दिन बिना रुके चलते जा रहे थे. और फ़ाइनली उनका कारवाँ ट्राइबल वार से बचता बचाता किसी तरह ओएसिस तक पहुँच ही गया. फिर वो अल्केमिस्ट अपने ओमेन के सजेशन पर बड़ी बेसब्री से एक आदमी का इंतज़ार करने लगा जो उसे कुछ सीक्रेट्स बताने वाला था. अपने हथियार उतारने के बाद कारवाँ के लोगो को ओयसिस में ठहरने के लिए जगह मिली. और फिर नेक्स्ट डे वो इंग्लिशमेन उस लड़के के साथ अल्केमिस्ट की तलाश में निकल पड़ा. वे एक कुंए के पास पहुंचे. वहां काले कपड़ो में कुछ औरते खड़ी थी. सेंटियागो को किसी ने बताया था कि वहां मैरिड औरतो से बात करना मना है इसलिए वे लोग वेट करते रहे. कुछ देर बाद उन्हें एक अनमैरिड औरत कुंए की तरफ आती दिखी.


वो इतनी खूबसूरत थी कि सेंटियागो उसे देखता ही रह गया. और तब पहली बार उसे लव की लेंगुएज समझ आई जो सारी दुनिया में एक सी बोली जाती है. उसका दिल गवाही दे रहा था कि वे दोनों एक दुसरे के लिए ही बने है. सेंटियागो के पूछने पर उस लड़की ने अपना नाम फातिमा बताया. अब हर रोज़ वो उससे कुंए पर पन्द्रह मिनट के लिए मिलने जाता था जोकि उसकी लाइफ बन चुकी थी. फिर जल्द ही ये खबर भी उड़ने लगी कि ट्राइबल वार अभी लम्बी चलने वाली है और जब तक ये ख़त्म नहीं होती, वे लोग वहां से नहीं निकल सकते. अब उनके पास ओएसिस में रुके रहने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं था और शायद उन्हें कई और साल वहां गुजरने पड़े. वो लड़की भी सेंटियागो को उतना ही चाहती थी. दोनों अब बहुत क्लोज आ चुके थे.


सेंटियागो ने उसे अपनी लाइफ के बारे में सब कुछ बता दिया था, खजाने के बारे में भी. फातिमा ने उसे कहा कि वो खजाने की तलाश ना छोड़े. उसके सामने दो रास्ते थे. या तो वो इसी ओएसिस में रहकर अपने सवालों के ज़वाब ढूढे या फिर डेजर्ट का रास्ता पकड़े. लेकिन फिर से एक बार वो इस खजाने की तलाश में निकल पड़ा. इस टाइम तक काफी अँधेरा हो चूका था. तभी उसे एक और ओमेन दिखा दो बाज़ उसके उपर से उड़ रहे थे कि तभी एक ने दुसरे पर अटैक किया. उस टाइम वो खुद भी जैसे इस दुनिया की आत्मा में घुस चूका था जिसकी वजह से उस ओमेन का इंटरप्रेशन ये था कि ओएसिस पर अटैक होगा.


उसने ये बात अपने ऊंट ड्राइवर को बताई जिसने उसे कहा कि वो जाकर ये बात ओएसिस के चीफ को बताये तो सेंटियागो ने ये बात जाकर चीफ को बताई. चीफ ने अपने साथियों से कंसल्ट किया और इस खबर की सच्चाई टेस्ट करने की सोची. सेंटियागो को बोला गया कि नेक्स्ट डे सब लोग वार के लिए रेडी रहेंगे और अगर उसकी अटैक वाली बात सच हुई तो सेंटियागो को रिवार्ड दिया जाएगा. और अगर उसकी बात झूठ निकली तो बदले में सेंटियागो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा. सेंटियागो ने इस फैसले को अपना "मकतब" यानी डेस्टिनी समझ कर एक्स्पेट कर लिया. फिर जब वो पीछे जाने लगा तो उसे एक हॉर्समेन मिला जो बड़ा हैरान था.


उसने सेंटियागो से ओमेन का राज़ पुछा तो सेंटियागो ने बड़ी ब्रेवली उसे सब कुछ बता दिया और ये भी बताया कि उसे इसका प्रेडिक्शन मालूम नहीं था. उसके इस ज़वाब से वो हॉर्समेन सेटिसफाईड लग रहा था उसने उसे जाने दिया और सबसे कहा कि इस लड़के की हिम्मत ही वो चाबी है जिससे इस दुनिया की लेंगुएज समझी जा सकती है. उस हॉर्समेन के ऐसे डीप वर्ड्स सुनकर सेंटियागो को ओल्ड किंग की याद आ गई. उस हॉर्समेन के इस स्माल जेस्चर से उसे पता चल गया कि वो ही अल्केमिस्ट है और अगर अटैक में उसकी जान बची तो सेंटियागो को उससे मिलना था और नेक्स्ट डे उन पर सचमुच अटैक हुआ. फाइव हंड्रेड हॉर्समेन ने ओएसिस को घेर रखा था. लेकिन ओयसिस में रहने वाले भी पूरी तरह रेडी थे और सिर्फ आधे घंटे में ही उनके लीडर को छोड़कर सारे अटैकर्स मारे गए. लीडर को पूछताछ के लिए चीफ के पास लाया गया और बड़े ओनर के साथ उसे फांसी पर लटका दिया गया.


पार्ट 4.


सेंटियागो को ईनाम में 50 गोल्ड कोइंस मिले और साथ ही उसे ट्राइब का काउंसिलर बनाने की भी बात हुई. लड़ाई अब खत्म हो चुकी थी इसलिए सेंटियागो अल्केमिस्ट से मिलने गया जिसने उसे अपने टेंट में डिनर के लिए इनवाईट किया था. उसने सेंटियागो को खजाने की तलाश में पिरामिड जाने के लिए कहा. लेकिन जब सेंटियागो ने कहा कि उसे खजाने के तौर पर फातिमा मिल गयी है तो अल्केमिस्ट ने उसकी बात काटी. उसने सेंटियागो से कहा कि उसे फातिमा पिरामिड से नहीं मिली इसलिए वो खजाना नहीं हो सकती है. उसने फिर सेंटियागो को एडवाइस दी कि उसे अपने ऊंट बेचकर एक घोडा लेना चाहिए क्योंकि वो ज्यादा डिपेंडेबल रहेगा. नेक्स्ट नाईट वे दोनों एक साथ सफर पर निकल पड़े. अल्केमिस्ट ने सेंटियागो से कहा कि वो डेजर्ट में उसे लीड करे.


स्टार्टिंग में सेंटियागो थोडा कन्फ्यूज़ हुआ फिर लड़के सीख लिया कि जहाँ रास्ता मिले बढ़ते जाओ. और इस तरह उसका घोडा उसे एक स्पॉट पर लेकर पहुंचा जहाँ उन्हें लाइफ फॉर्म एक स्नेक के रूप में दिखी. यही वो ओमेन था जो अल्केमिस्ट देखना चाहता था. वो सेंटियागो को खजाने तक पहुंचाने के लिए कमिटेड था लेकिन वो लड़का तो बस ओएसिस में रहकर फातिमा के साथ एक पीसफुल लाइफ गुजारना चाहता था. इस पर अल्केमिस्ट ने सेंटियागो से कहा कि कुछ टाइम तक तो उसकी लाइफ अच्छी गुजरेगी लेकिन अगर उसने अभी खजाना नहीं ढूँढा तो बाद में वो पछतायेगा और कभी खुश नहीं रह पायेगा.


क्योंकि उसकी डेस्टिनी में यही लिखा है कि वो खज़ाना ढूंढें. वे दोनों रात काटने के लिए फिर से ओएसिस में लौटे. सेंटियागो ने फिर से एक बार मन बनाया कि वो अपनी डेस्टिनी फोलो करेगा और यही बात उसने अल्केमिस्ट को भी बताई. और नेक्स्ट डे वे दोनों सूरज उगने से पहले अपनी जर्नी पर निकल पड़े. वे डेजर्ट में घुमते रहे. फातिमा की जुदाई में सेंटियागो का दिल भारी हो रहा था. अल्केमिस्ट ने उससे कहा कि वो पुरानी बाते भूल कर आगे बड़े अगर फातिमा का प्यार उसके नसीब में लिखा है तो उसे ज़रूर मिलेगा. लड़का उस डेजर्ट में बढ़ता जा रहा था, वो डेजर्ट से काफी कुछ सीख रहा था. वे वार जोन के रास्ते अवॉयड करते रहे, कभी-कभी तो उन्हें ब्लड की स्मेल से ही पता लग जाता था कि कहीं पास में ही वार हो रही है.


और इस तरह बड़े केयरफूली चलते हुए वे अपनी जर्नी के काफी क्लोज आ गए थे. जहाँ डेजर्ट का एक बड़ा स्ट्रेच फैला हुआ था जिस पर बड़ी भारी लड़ाई चल रही थी. पूरी जर्नी के टाइम सेंटियागो के सामने काफी कॉफ्लिक्ट मोमेंट्स आये. वो कभी खुश होता था तो कभी उदास हो जाता था. उसने अल्केमिस्ट को ये बात बताई. अल्केमिस्ट उसकी बाते बड़े ध्यान से सुनकर अच्छी कांउसिलिंग करता था जिससे सेंटियागो उससे दिल खोलकर बाते करता और अपनी सर्च के बारे में अच्छा फील करता था. क्योंकि वो अपनी डेस्टिनी की तरफ बढ़ रहा था और इसका हर मोमेंट उसके लिए मायने रखता था. अब तक अपने पास्ट के एक्स्पिरियेंश से उसने काफी कुछ सीख लिया था और वो आज जो कुछ भी था, जहाँ पर भी था, अपनी लर्निंग की वजह से ही था.


ये सब लाइफ की एक बड़ी प्लानिंग का पार्ट था, ये प्लानिंग अनदेखे हाथो ने लिखी थी जो सबकी लाइफ की प्लानिंग लिखते है. हार्ट ने ये सीखा कि सफरिंग और फेलियर का डर एक्चुअल सफरिंग और फेलियर से बड़ा होता है. ये सब जानकार अब सेंटियागो का मन शांत था. ये सब उसने अल्केमिस्ट से शेयर किया तो उसने कहा कि अब वो अपनी डेस्टिनी के लिए पूरी तरह प्रीपेयर है. लेकिन अभी उसे लड़के को एक लास्ट लेखन देना बाकी था और ये लेसन था" जो कुछ उसने अब तक सीखा उसका टेस्ट देने के लिए उसे प्रीपेयर रहना था". और ये इसलिए क्योंकि हर सर्च बिगेनर के लक से स्टार्ट होती है. ताकि जो कुछ लेसन हमने सीखे है वो पूरी तरह से जिंदगी भर के लिए हमारे अंदर समां जाये. और फिर जल्दी ही टेस्ट का दिन भी आया.


उन्हें एक ट्राइब ने घेर लिया था. वे लोग उन्हें अपने चीफ के पास ले गए और पूछताछ शुरू कर दी. जान बचाने के लिए अल्केमिस्ट ने सेंटियागो का सारा गोल्ड उन लोगो को दे दिया. और साथ ही ये भी कहा कि उस लड़के में ऐसी पॉवर है कि वो उन्हें हवा बनके दिखा देगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो लोग उन्हें तीन दिन में मार सकते है. अब ये बात सेंटियागो के लिए कुछ ज्यादा हो गयी थी, वो बहुत डर गया था कि आगे क्या होगा..


पार्ट 5.


पहले दिन के खत्म होने पर सेंटियागो ने अल्केमिस्ट से कहा कि उसे हवा बनना नहीं आता. इस पर अल्केमिस्ट ने जवाब दिया कि वो उसकी प्रॉब्लम है क्योंकि उसे तो ये जादू आता है. दुसरे दिन वो लड़का दिनभर एक माउन्टेन के ऊपर बैठा रहा और डेजर्ट से बाते करता रहा. जब तीसरे दिन अपना जादू दिखाने का टाइम आया तो उसने डेजर्ट से हेल्प करने की रिक्वेस्ट की. डेजर्ट ने उससे कुछ सवाल किये जिसका जवाब उस लड़के बड़ी हिम्मत से दिया. डेजर्ट उसे अपनी सेंड देने के लिए तैयार हो गया और उससे कहा कि वो हवा से हेल्प मांगे. जब सेंटियागो ने हवा से हेल्प मांगी तो हवा ने भी कुछ सवाल किये और उन सवालों के जवाब भी उसने उसी तरह हिम्मत दिए.


उसने हवा को कन्विंस किया कि वो इतनी तेज़ चले कि वो आसमान से हेल्प ले सके. हवा उसकी बात मान गयी और जोर जोर से चलने लगी. लड़के ने फिर सूरज से बात की और उसे भी तेज़ चमकने के लिए कन्विंस कर लिया. सूरज ने उसे कहा कि वो उन हाथो से बात करे जिन्होंने ये सब कुछ लिखा है. अब उस लड़के ने प्रे करना शुरू कर दिया. उसकी प्रेयर साइलेंट थी मगर उसका हार्ट उस ऊपर वाले से कनेक्ट था. उसे सोल ऑफ गॉड की पॉवर रियालाईज हुई और ये भी रियेलाईज़ हुआ कि उसके अंदर भी सोल ऑफ़ गॉड मौजूद है. वो इस सीक्रेट को समझ गया था कि इंडीविजुली किसी को भी नहीं पता होता है कि उन्हें क्या करना है क्योंकि सारा प्लान उन सुप्रीम पॉवर के हाथो लिखा होता है.


और उसने सबके लिए एक प्लान लिखा होता है. कुछ लोग ये बात समझ जाते है और जो नहीं समझ पाते वो फना हो जाते हैं. सेंटियागो को जब इस सीक्रेट का पता चला तो उसे एहसास हुआ कि उसमे और उसकी डेस्टिनी लिखने वाले हाथो में कोई फर्क नहीं है, वे एक हो गए है. और जैसे ही उसे ये रिवील हुआ उसने ऊपरवाले की हेल्प से खुद को हवा में बदल कर दिखा दिया. सब हैरान रह गए और सेंटियागो शर्त जीत गया. उसे और अल्केमिस्ट को छोड़ दिया गया और ट्राइब की तरफ से साथ में चलने के लिए गार्ड भी दिए गए जिन्हें वो चाहे जितनी दूर तक साथ रख सकते थे. चलते-चलते वे लोग एक मोंटेसरी पहुंचे जहाँ उन्होंने गार्ड्स को गुडबाई बोला और आगे बड़े अल्केमिस्ट ने उसे एक रास्ता दिखाया जो गोल्ड में टर्न हो सकता था.


दोनों वहां से अलग हो गए. अल्केमिस्ट वापस ओएसिस में लौट गया और सेंटियागो खजाने की तलाश में आगे चलता रहा. वो अपने दिल की सुन रहा था और आगे बढ़ता जा रहा था. और फाइनली वो पिरामिड्स तक पहुँच ही गया. अपनी मंजिल देखकर वो रो पड़ा और जहाँ पर उसके आंसू गिरे वहां उसे एक बीटल दिखा जोकि उस इलाके में गॉड का सिम्बल माना जाता था. उसे ये एक और ओमेन लगा और उसने वहां पर खोदना शुरू कर दिया. उसने काफी गहरे तक खोदा मगर कुछ नहीं निकला. तभी उसके पास कुछ ट्राइब्स मेन आये जो वार से अपनी जान बचाकर लौट रहे थे. उन्होंने सेंटियागो का वो सारा गोल्ड छीन लिया जो उसे अल्केमिस्ट ने पार्टिंग गिफ्ट के तौर पे दिया था. उन्होंने सेंटियागो की ख़ूब पिटाई की और उसे सेंड में और डीप खोदने के लिए बोला.


जब लड़के ने उन्हें बताया कि उसने ड्रीम में यहाँ पर खजाना गड़ा हुआ देखा था तो उन लोगो को लगा कि यहाँ उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला क्योंकि ड्रीम कभी सच नहीं होते. जाते-जाते ट्राइब्समेन के चीफ ने उससे कहा कि उसने भी एक ड्रीम देखा था कि स्पेन के एक चर्च के अंदर खजाना छुपा है जहाँ एक टूटे हुए कमरे में साईकामीर का पेड़ उगा है. ये बोलकर वो चीफ और उसके साथी वहां से चले गए. लड़का ख़ुशी से ठहाके लगाने लगा क्योकि ये एक्जेक्ट वही जगह थी जहाँ उसे ईजिप्ट के खजाने का ड्रीम आया था. तो वाकई में कोई खजाना था लेकिन उसे पाने का रास्ता इतना लंबा था उसे पहले डेजर्ट में पिरामिड्स तक पहुंचना था फिर किसी और के थ्रू उसके बारे में जानना था. अगर उसने अपनी डेस्टिनी फोलो नहीं की होती तो शायद उसे कभी भी उस खजाने का पता नहीं चल पाता जो उसके अपने ही देश में छुपा था.


एपिलोग 


सेंटियागो चर्च में गया और खजाने को खोद निकाला. फिर वो उस जिप्सी औरत के पास गया जिसे उसने वन टेंथ देने का प्रोमिस किया था. उसके बाद उसे हवा में वो खुशबू महसूस हुई जो उसे बड़े अच्छे से याद थी और जो अभी उसके होंठो पर एक याद बनकर बैठी थी. ये खुशबू भी फातिमा की. उसने अपने प्यार को बड़ी जोर से आवाज़ दी " मैं आ रहा हूँ, फातिमा !"

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The Power Of Subconscious Mind in Hindi – अवचेतन मन की शक्ति हिन्दी में


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The Power Of Your Subconscious
 Mind Book In Hindi
By -- Joseph Murphy 




About Book

आपके अंदर एक पूरा खज़ाना छुपा हुआ है, वो आपका सबकॉन्सियस माइंड है. हो सकता है आप अभी कमजोर, गरीब, अकेले और अनसक्सेस्स्फुल हों. ये बुक आपको अपना जीवन बदलने में मदद करेगी. द लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन कहता है कि आप जो सोचते हैं वही आपको मिलता है. अगर आप अपने मन में सफलता, खुशी, पैसा, प्यार और फिटनेस के विचार पैदा करते हैं, तो ये सब आपको मिल सकता है.


यह बुक किसे पढना चाहिये। 

जो लोग बिमारी से लड़ रहे हैं, गरीबी, डिप्रेशन और मायूस हो गए हैं, जो लोग अपनी लाइफ बदलना चाहते हैं.


आँथर के बारे में।

जोसेफ मर्फी आयरलैंड में एक कैथोलिक प्रीस्ट थे. लेकिन वो लॉस एंजेलिस चले गए, जहाँ वो डिवीने साइंस के मिनिस्टर बने. उन्होंने साइकोलॉजी में पीएचडी हासिल की और पावर ऑफ़ द माइंड के बारे में कई बुक्स लिखीं हैं.


The power of your Subconscious mind


ये किताब ख़ास आपके लिए लिखी गई है आपको ये जानकारी देने के लिए कि आपके सब-कोंशेस दिमाग में इतनी ताकत है जितना आप सोच भी नहीं सकते और इसकी जादुई ताकत से आपको वाकिफ कराना ही इस किताब का मकसद है ताकि आप इसका भरपूर फायदा उठा सके.


आपके अन्दर एक खज़ाना मौजूद है एक 75 साल की विधवा ने हमारे लेखक को ख़त लिखकर बताया कि वो दुबारा शादी करके घर बसाना चाहती है और खुश रहना चाहती है. उसने वही किया जैसा लेखक ने उसे करने को बोला था. वे औरत खुद को बार-बार याद दिलाती रहती थी कि वो एक खुशहाल शादीशुदा औरत है और अपने पति से बहुत प्यार करती है. और आखिर में एक दिन वो एक बड़े फार्मासिस्ट से मिली और उनसे प्यार कर बैठी. आज दोनों शादीशुदा है और खुश है. आपके अन्दर असल में एक पूरी सोने की खान है जो आपका सब कोंशेस माइंड है. बस अगर आप इसे कण्ट्रोल करके अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना सीख जाए तो क्या बात है !


आप जब किसी टेस्ट से पहले खुद को ये यकीन दिलाते रहते है कि आप फेल हो जायेंगे या फिर कोई चीज़ आपको नहीं मिलेगी तो दरअसल आप अपने ही दिमाग को ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहे होते है. आप अपने दिमाग की सुपर पॉवर को गलत आइडिया दे रहे होते है कि आप ये नहीं कर सकते या वो नहीं कर सकते. मगर ऐसा कभी मत कीजिये कभी भी अपने दिमाग में नेगेटिव आईडीया मत आने दे बल्कि पूरे जोश के साथ दोहराते रहे, विश्वास रखे, और उम्मीद भी और फिर आप देख्नेगे कि आपके सब कोंशेस ही आपके सारे सवालो का जवाब बन जाएगा.


अध्याय 2: आपका दिमाग कैसे काम करता है।


एक बूड़ी औरत को यकीन हो चला था कि उसकी याददाश्त चली जाएगी मगर उसने अपने दिमाग को यही यकीन दिलाये रखा कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा. बल्कि वे खुद को यकीन दिलाती रही कि उसकी याददाश्त दिन-ब-दिन बढती जा रही है. अब ये उसका मज़बूत विश्वास ही था कि सच में उसके साथ ऐसा ही हुआ. हमारे दिमाग का कोंशेस और सब कोंशेस हिस्सा एक दुसरे से अलग होने के बावजूद आपस में जुड़े हुए है. जो कुछ आप सोचते है वो अपने कोंशेस मांइड वाले लेवल से सोचते है और जो भी आप करते है छोटी से छोटी चीज़ वे आपके सब-कोंशेस लेवल को अफेक्ट करती है।


हालांकि ये समझना ज़रूरी है कि सब- कोंशेस और कोंशेस लेवल दोनों अलग-अलग नहीं है बल्कि एक ही दिमाग के दो अलग लेवल है. कोंशेस माइंड वो है जो सोच-विचार करता है और सब कोंशेस माइंड आपकी हर सोच पर विश्वास करके उसे अपना लेता है. जो कुछ भी आप सोचते है और करते है उस पर सब कोंशेस माइंड पूरी तरह यकीन करता है. उदाहरण के लिए हिप्नोसिस के पीछे सिर्फ एक वजह ये है कि आपका सब कोंशेस माइंड इस पर यकीन करता है और फिर आपसे जो कहा जाता है उसे आपका कोंशेस माइंड बिना किसी जिद के उसे मानने लगता है. फिर आप चाहे सही या गलत जो भी विचार रखते है उसे ये बेहिचक अपनाने लगता है. तो याद रखिये कि आप अपनी कश्ती के खुद ही मालिक है, सारा कंट्रोल आपके हाथो में है तो सोच समझ कर चुने अच्छा चुने और अपनी खुशियाँ चुने.


अध्याय 3: आपके सब-कोंशेस दिमाग के काम करने की जादुई तगात।

एक स्कॉच सर्जन, डॉक्टर जेम्स एस्टिले ने कुल 400 ओपरेशन किये. तब तक एनेस्तीथीसिया की खोज नहीं हुई थी जिस से वो अपने पेसेन्ट को बेहोश कर सके। तो उन्होंने आखिर ये किया कैसे ? अपने मरीजों को मेंटल एनेस्थीसिया देकर. वे उन्हें पूरी तरह यकीन दिला देते थे कि ओपरेशन में उन्हें किसी भी तरह का दर्द नहीं होगा और ना ही कोई इन्फेक्शन. उनके ओपरेशन सफल हुआ करते थे और उनका मोर्टलिटी रेट यानी पेसेन्ट को को मारने का रेट भी बहुत कम था सिर्फ 2 या 3% ही अपने मरीजो का ओपरेशन करने से पहले वे उनके सब-कोशेस माइंड को हिप्नोटिक करके उनके कानो में बोलते थे" तुम्हे कुछ नहीं होगा, तुम ठीक हो जाओगे तुम स्वस्थ हो"।


आपका सब-कोंशेस दिमाग आपका सब कुछ कण्ट्रोल करता है, आपके खून का बहाव, आपका digestion और आपके thoughts. एक बार अगर आप इसकी ताकत समझ ले तो इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते है. जब आप नेगेटिव सोचते है तो वे आपकी डिसट्रकटिव इमोशन होती है जिसे अपने दिमाग से निकालना बेहद ज़रूरी हो जाता है. वर्ना आपकी बॉडी में उल्सर्स, हार्ट प्रोब्लेम्स, एंजाईटी या मेंटल इलनेस जैसे प्रोब्लेम्स होना शुरू हो जायेंगी. अपने दिमाग में उठने वाले हर ख्याल पर गौर करे क्योंकि वही फिर आपके एक्शन बनने लगते है क्योंकि जब भी आप सोचते है जो कुछ सोचते है उसे आपका सब-कोंशेस माइंड रीएक्शन देने लगता है. तो जब भी आप सोये उससे पहले मन में एक इरादा करे, एक टार्गेट चुने और खुद से ही कहे कि आप उसे पूरा करना चाहते है. आप कुछ भी सोच सकते है. अपनी अच्छी सेहत, पैसा या फिर लोगो के साथ अपने रिश्ते के बारे में भी. पोज़िटिव विचारों को आने दे अपने दिमाग को प्रोग्राम करते रहे और फिर इसके Miracles क्या होंगे ये आप सोच भी नहीं सकते है।


अध्याय 4 और 5 मेंटल हीलिंग के पुराने और नये तरीके।


1910 का एक मशहूर किस्सा है. एक आदमी को टंग पैरालिसिस हुआ यानि उसकी जीभ को लकवा मार गया. उन दिनों इसका कोई भी इलाज नही था. वो डॉक्टर के पास गया तो उसने उसकी जबान में एक थर्मामीटर रखकर कहा कि ये एक बिलकुल नया इंस्ट्रूमेंट है जिससे उसकी जीभ ठीक हो जायेगी. और सच में कुछ ही मिनटों बाद उसकी जीभ ठीक हो गयी थी और वो उसे हिला-डुला पा रहा था. बहुत से एक्सपेरिमेंट में हिप्नोसिस किये गए लोगो को आसानी से ये यकीन करा दिया जाता है कि उन्हें कोई ख़ास बिमारी है और फिर वे लोग सच में उसी बीमारी के सिम्पटम्स दिखाने लगते है. क्योंकि उनका सब-कोंशेस दिमाग कही हुई बातो पर यकीन कर लेता है इसमें इतनी ताकत होती है कि वे उसी तरीके से एक्ट भी करने लगता है. ये अपोजिट भी काम करता है जब किसी मरीज़ के सब-कोंशेस दिमाग को यकीन दिलाया जाता है कि वो ठीक हो रहा है. तब ऐसा लगता है कि वो कभी बीमारी का शिकार था ही नहीं. आपके शरीर पर कोई असर तब तक नहीं होगा जब तक आपका सब-कोंशेस माइंड ऐसा करने को ना बोले हमेशा अपने सब - कोंशेस दिमाग की ताकत को याद रखे. ना जाने आपके जीवन मे इसकी बदौलत कब क्या चमत्कार हो जाए इसलिए कोई भी मौका मिस न करे।


आज हम सब अपने सब कोंशेस माइंड की पॉवर से वाकिफ है मगर हममें से बहुत से लोग इसका सही इस्तेमाल करना नहीं जानते है. उन्हें ये पता नहीं होता कि इसकी ताकत से कैसे अपनी जिंदगी को बदला जा सकता है. और ऐसा करने के लिए सबसे पहले तो ये जाने कि आपको क्या चीज़ हील करती है और फिर उसे अपने सब कोशेस माइंड को गाइड करने में इस्तेमाल करे. दिमाग में कोई एक प्लान बनाये, उसे काम करता हुआ देखे, फिर बुरे या नेगेटिव ख्याल ना आने दे क्योंकि ऐसा करना बेवकूफी होगी. और आखिरी बात ये कि प्रे करे और अपनी दुवाओ पर यकीन रखे।


अध्याय 6: मेंटल हीलिंग की प्रेक्टिकल टेक्निक :


जब गोल्डन गेट ब्रिज बना तो इंजीनियरिंग कंपनी के पास एक प्लान था. इस प्लान में पहली बार (stresses and strains) स्ट्रेस और स्ट्रेंस की बात कही गयी थी जो ब्रिज पर पड़ सकता था. तब उन्होंने एक मजबूती पूरी तरह से आईडियल ब्रिज के बारे में सोचा और उसे प्रेक्टिकली टेस्ट किया गया. ये सारे स्टेप्स आर्डर में किये गए और कोई भी स्टेप पहले या बाद में नहीं अपनाया गया वर्ना ब्रिज पूरी तरह नाकामयाब रहता।


जिस तरह हमारी दुआए सुनी जाती है वे भी कुछ इसी तरह है. जो हमें मिलता है ना पहले ना बाद में बिलकुल सही वक्त पर ही मिलता है. कुछ चीज़े पहले होनी होती है तो कुछ बाद में. इनमे से सबसे पहली टेक्निक है पास ओवर टेक्निक. सिंपल तरीके से अपने विचारो और इच्छाओ को अपने सब कोंशेस माइंड में रखते जाए ताकि आप किसी भी तरह की सिकनेस दूर कर पाए. जैसे कि कोई छोटी सी लड़की जिसका गला ख़राब है। और बुरी तरह खास रही है वो अगर खुद से मज़बूत इरादे से कहे कि मेरी बीमारी जा रही है, ये दूर हो रही है" तो घंटे भर बाद ही सच में वो ठीक महसूस करने लगेगी.


दूसरी सिंपल टेक्निक है विजुएलाइजेशन टेक्निक. आप विजुएलाइज करके, अपने दिमाग में तस्वीर रच कर ऐसा कर सकते है. जो आप चाहते है उसे हरदम ख्यालो में रखे. आप अपने फोन या लेपटोप पर उसकी वालपेपर लगा कर भी ऐसा कर सकते है या फिर एक ड्रीम बोर्ड भी बना सकते है. या अपने सपने की फोटो कार्डबोर्ड में लगाकर रखे और रोज़ उसे देखे. आखिर में आती है स्लीपिंग टेक्निक जिसमे जब आप सो रहे होते है तो आपकी बॉडी का एफर्ट और स्ट्रेस कम होता है। उस वक्त आपका सब-कोंशेस एक्टिव हो जाता है aur आपके विचार और भी बेहतर ढंग से एब्ज़ोर्ब कर लेता है जिससे आपके दिमाग और शरीर को अपनी चाही गयी चीज़ हासिल करने में मदद मिलती है. इसलिए ऑटो-सजेशन और विजुएलाइज के लिए सोने से बिलकुल पहले का टाइम सबसे बढ़िया रहता है.


अध्याय 7: सब-कोंशेस दिमाग की आदत लाइफवार्ड है।


लेखक (Robert Louis Stevenson) रोबर्ट लुईस स्टीवनसन हर रात सोने से पहले कुछ करते थे. वे सोने से पहले अपने सब कोंशेस माइंड को उन सारी कहानियों से भर देते थे जो उन्हें लिखनी होती थी. और इस तरह वे कहते है कि उनके सब-कोंशेस माइंड की डीप पॉवर उन्हें एक बढ़िया कहानी पूरी तरह तैयार करके देती है जिसे बाद में वे लिख लेते थे. उनकी इस बात से पता चलता है कि हमारी सब-कोंशेस ताकत कितनी जबर्दस्त होती है. ज़्यादातर बच्चे हेल्दी और स्टोंग पैदा होते है, ये बहुत आम बात है मगर बीमार पड़ना और कमज़ोर होना नार्मल नहीं है क्योंकि ये लाइफ स्ट्रीम के खिलाफ है. सेल्फ- प्रीज़रवेशन हम इंसानों की सबसे स्ट्रोंग इंस्टिक्ट होती है.


फ्रेड्ररेक एलियस एंड्रयूज एक ऐसा लड़का था जिसे पोटस की बिमारी थी जिसे स्पाइन का ट्यूबरक्लूसीस भी कहा जाता है. अपने बीमारी के दौरान वो प्राथना किया करता था कि वो ठीक हो जाएगा और उसकी प्रेयर्स काम आई और वो सच में ठीक होकर एक तन्दुरुस्त इंसान बन गया. सोने से पहले वो उसी स्लीपिंग टेक्निक मेथड का इस्तेमाल किया करता था जिसके बारे में आपको पहले बताया गया था और ये तरीका काम आया. हर ग्यारह महीने में आपका शरीर खुद को रीन्यू करता है. अपने नेगेटिव विचारों को पोजिटिव में बदलिए क्योंकि यही स्ट्रीम ऑफ़ लाइफ है कि हम हेल्दी रहे, स्ट्रोंग बने और बिना किसी नेगेटिविटी, डर, एन्जाईटी और जलन की भावना से दूर रहे क्योंकि ये आपको बहुत सी बीमारियों का शिकार बनाती है तो इन सबसे बचने के लिए हमेशा पोजिटिव सोचे.


अध्याय 8: जो रिजल्ट आप चाहते है उन्हें कैसे पाया जाए।


एक बार एक मकान मालिक था जो फरनेस रीपेयरमेन से इस बात पर लड़ रहा था क्योंकि वो एक बायलर को ठीक करने के दो सौ डॉलर मांग रहा था. मकान मालिक ने कहा कि ये बहुत ज्यादा रकम है इस पर रीपेयरमेन ने जवाब दिया कि वो मिसिंग पीस के सिर्फ 5 डॉलर ही मांग रहा है बाकी के 195 डॉलर तो वो अपनी इस काम की नॉलेज होने की फीस ले रहा है. ठीक इसी तरह आपका सब-कोंशेस माइंड भी बहुत होशियार है जिसमे पास आपके शरीर, मन और आत्मा की हर तकलीफ और दुःख दर्द करने के अनेक तरीके है. हमारे फेल होने का एक ज़रूरी वजह होती है कि हमारे अन्दर मोटिवेशन और कांफिडेंस की कमी होती है. क्योंकि जब लोग ध्यान लगाकर कोई प्राथर्ना कर रहे होते है तो कई बार उन्हें उस पर उतना गहरा यकीन नहीं होता जितना कि होना चाहिए. उनके मन में नेगेटिव विचार चलते रहते है और यही वजह है उन्हें अपनी प्राथर्ना का जवाब नहीं मिलता. इसलिए अपने कोंशेस और सब-कोंशेस के बीच कोंफ्लिक्ट दूर करने के लिए सोने से पहले स्लीपिंग टेक्निक का इस्तेमाल करे. अपने सपनों को पूरा होता हुआ देखे बार-बार.


अध्याय 9 और 10 अपने सब कोंशेस की पॉवर को पैसे और अपने अमीर होने के लिए कैसे इस्तेमाल करे:


लेखक का एक दोस्त सालाना 75,000$ कमाता है यानी लगभग 55 लाख रुपये. वो एक बार दुनिया घूमने के लिए नौ महीने की लम्बी छुट्टी लेकर एक क्रूज़ पर गया. उसने खूब पैसे उड़ाए, मज़े किये और जब वो वापस काम पर लौटा तो उसने कुछ महसूस किया कि उनके कई साथी जो उनसे बिजनेस के बारे मे ज्यादा जानते थे, और ईवन बेहतर काम कर सकते थे। लेकिन वो सारे उनसे छोटे पोजिशन में ही रह गये थे और उनसे कम सेलरी लेते थे। ऐसा क्यो था क्योकि उन सब को ना तो अपने सब कोंशेस की पॉवर के बारे में ना तो कोई नॉलेज थी और ना ही कोई इंटरेस्ट और इसलिए उनके कोई बड़े सपने भी नहीं थे. ऐसे लोग एक तरह से क्रियेटिविटी से भी कोसो दूर होते है.


सच तो ये है कि कोई भी रातो-रात अमीर नहीं बनता सिर्फ सोचने भर से. इसके लिए आपको सब-कोंशेस माइंड में कुछ नए आइडिया सोचने होंगे, इसे मोटिवेट करना पड़ेगा. तभी तो ये आपको अमीर बनने में मदद कर पायेगा. इसे मोटिवेशन देते रहे कि आप अमीर है, आप प्रॉफिट कमा रहे है और आपका सब कोंशेस जो नए विचार आपको देगा उन पर काम करना शुरू कर दे. जो आप कहे उसे पर पूरी तरह यकीन करे क्योंकि आपका सब कोंस तभी उन आईडिया को एक्सेप्ट करेगा जब आप अपने कोंशेस माइंड में भी उन्हें एक्सेप्ट करेंगे.


अगर आपको ज्यादा पैसे कमाने की चाहत नहीं है तो फेल होने की राह में यही पहला कदम होगा | सबसे पहले तो ये विचार दिलो-दिमाग से निकाल फेंके कि पैसा सब बुराई की जड़ है. क्योंकि जब आप इसे बुराई मानकर नफरत ही करेंगे तो भला इसे कैसे अपनी तरफ अटरेक्ट कर सकते है. पैसे से नफरत करेंगे तो आपके हाथ कुछ नहीं लगने वाला इसके बदले पैसे को अपना सबसे बड़ा दोस्त समझकर इसे प्यार करे. अपने अमीर होने पर यकीन रखे. जो लोग पैसे की बुराई करते है अक्सर वही किसी ना किसी फिनेंशियल परेशानी से गुज़र रहे होते है. जो ऐसा सोचता है उसके दोस्त जब उससे ज्यादा कमाते है और आगे निकल चुके होते है तो ऐसे लोग जलभुन कर ख़ाक हो जाते है, उनका दिमाग नेगेटिव विचारों से भर जाता है. जिस चीज़ के लिए वो प्रे कर रहे होते है अब उसी को कोसते रहते है. पैसे की ताकत बड़ी है मगर इसे भगवान् ना बनाये. पैसा तो बस सफल होने की एक निशानी है असली खजाना तो आपके दिमाग में छुपा है जो आपके विचार है इसलिए पैसे की कभी भी बुराई ना करे.


अध्याय 11 और 12 : आपका सब- कोंशेस माइंड आपकी सफलता का साथी है और देखिये किस तरह साइंटिस्ट इसका इस्तेमाल करते है :


सफल होने के लिए तीन खास स्टेप्स है :

स्टेप 1: अपने पसंद की चीज़े करे जिनसे आपको ख़ुशी मिलती हो, अगर आपको पता नहीं कि वो क्या है तो उसे जानने के लिए पूरे दिल से प्राथर्ना करे.

स्टेप 2: किसी एक ख़ास चीज़ में महारत हासिल करे. जो आपको पसंद हो उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी रखे. जैसे कि, मान लो आपको डेंटिस्ट का काम पसंद है तो इसकी किसी खास ब्रांच में स्पेशलिस्ट बन जाए जैसे एनडोडॉटिक्स या ओरल सर्जरी या किसी और चीज़ में.

स्टेप 3: जो भी आपको पंसद हो वो सिर्फ आप तक ना सिमित रहे, सिर्फ आप ही नहीं बल्कि बाकी लोगो के भी काम आये. अपनी पसंद से दुसरो का भी भला करे तो बेहतर होगा.

इन सब स्टेप्स को अपनाते वक्त अपने सब कोंशेस की पॉवर को कभी ना भूले. बहुत से साइंटिस्ट इस बात को जानते और मानते थे. एडिसन, मार्कोनी, आइनस्टाइन और बाकी बहुत से साइंटिस्ट अपने सब कोंशेस की आवाज सुनते थे और इसका उन्हें बहुत फायदा भी हुआ. बेहद कामयाब इलेक्ट्रिकल साइंटिस्ट टेस्ला को जब भी कोई आईडिया आता था तो वो अपने ख्यालो में ही उसका इन्वेंशन कर लेते थे. वो जानते थे कि अपने सब कोंशेस का इस्तेमाल करके वो जो चाहे वो बना सकते है. उनका दिमाग उस पॉइंट पर पहुँच चूका था कि किसी भी डीजायन के इन्वेंशन होने से पहले ही उनके दिमाग को उस डीजायन का डिफेक्ट भी नज़र आ जाता था. इसलिए इन्वेंट करने से पहले ही वे डीजायन इस तरह बनाते थे कि उसमें कोई डिफेक्ट ना रहे जिससे उनका पैसा और वक्त बर्बाद होने से बच जाता था.


अध्याय 13, 14 और 15: आपका सब-कोंशेस और नींद, मेरिटल प्रोब्लेम्स और खुशियाँ:


एक ऐसी टेक्निक है जिसे मै पर्सनली तब अपनाता हूँ जब अगले दिन कुझे कोई काम होता है और मुझे मन में ये डर रहता है कि मै टाइम पर उठ नहीं पाऊंगा. तो मै दिमाग में सोचता रहता हूँ और खुद को यकीन दिलाता हूँ कि सुबह मै टाइम पर उठ जाऊँगा. मै तब तक इस बारे में सोचता रहता हूँ जब तक मेरे सब - कोंशेस माइंड ये बात पूरी तरह बैठ नहीं जाती. और फिर दुसरे दिन मै एकदम टाइम पर ही उठता हूँ. और ये टेक्निक आजतक फेल नहीं हुई, एक बार भी नहीं. ये बहुत सिंपल टेक्निक है इसमें आपको कोई अलार्म भी नहीं चाहिए हालांकि मै फिर भी अलार्म सेट करके रखता हूँ मगर हमेशा अलार्म बजने से पहले ही मै उठ जाता हूँ जिससे पता चलता है कि सब-कोंशेस माइंड में कितनी पॉवर है.


गाइडेंस का मतलब हमेशा किसी चीज़ से या पैसे की मदद से नहीं होता और ज़रूरी नहीं कि जब आप जागे हुए हो तभी आपको गाइडेंस मिल सकती है, कई बार आपके सपने भी आपको गाइडेंस देते है. अपने सब-कोंशेस की पॉवर को कभी अनदेखा ना करे. इससे ना सिर्फ आपकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है बल्कि आपकी शादीशुदा जिंदगी पर भी किसी के साथ जिंदगी भर का सफ़र निभाने के लिए आपका रिश्ता स्प्रिचुअल होना भी ज़रूरी है. जब आप किसी से मुहब्बत किये बगैर सिर्फ पैसे, पोजीशन या अपने ईगो के लिए शादी करते है तो ऐसा रिश्ता कभी सच्चा नहीं होता. ऐसे रिश्ते लम्बे समय तक नहीं टिक पाते है. शादी का बंधन किसी भी चीज़ से ज्यादा स्प्रिचुअल होना चाहिए जहाँ दोनों पार्टनर के दिल एक साथ धडकते हो, जहाँ वे एक होकर जिंदगी के सफ़र में कदम रख सके.


आजकल लोगो का मानना है कि शादी हर प्रॉब्लम का जवाब है. लेकिन असल में ऐसा नहीं है. किसी को अपनाने से पहले आपको इसके लिए पूरी तरह तैयार होना पड़ेगा. अगर आप खुश नहीं है तो अपने पार्टनर को कैसे खुश रख पायेंगे. अपने पार्टनर से ये उम्मीद मत कीजिये कि वे आपको हर ख़ुशी देगा. खुद को खुश रखना आपकी जिम्मेदारी है ना कि किसी और की. अपने सब कोशेस को यकीन दिलाये कि आप अधूरे नहीं है, अपने आप में पूरे है. तभी आप किसी और से प्यार कर पायेंगे और शादी की जिम्मेदारी उठा पाएंगे.


अपनी शादीशुदा जिंदगी में गलतियों को दोहराना एक बहुत बड़ी निशानी है कि आपके मन में नेगेटिव विचार भरे हुए है. आपका सब-कोंशेस माइंड भी इन्ही नेगेटिव विचारों को अपना रहा है. अगर गलती हो गयी है तो उसे स्वीकार करके आगे बड जाए. अपने साथी और अपनी शादी में यकीन रखे ताकि आपका सब-कोंशेस भी यही माने हमेशा एक बात याद रखे कि शादी शुदा जिंदगी में परेशानियां आना बेहद आम बात है और इसके लिए एक्सपर्ट की सलाह लेने में कोई बुराई नहीं है. जब आपको दांत में दर्द होता है तो क्या आप इंजीनियर के पास जाते है ? नहीं ना. तो आपकी शादी भी आपके दांत के दर्द से कम ज़रूरी मसला नहीं है. जब भी कोई परेशानी आये तो अपने रिश्ते को बचाने के लिए एक्सपर्ट की राय ज़रूर ले. अपने पार्टनर और एक्सपर्ट के अलावा किसी तीसरे के साथ कभी भी अपनी मेरिटल पॉब्लेम डिस्कस ना करे.


आपकी खुशियाँ सिर्फ आपके हाथ में है. अगर आप यही सोचते रहेंगे कि आपकी शादी टूटने की कगार पर है तो जानते है क्या होगा? एक दिन ये सच में टूट सकता है. क्योंकि आप ऐसा सोचते है तो आपके सब- कोंस को भी यही यकीन होने लगता है. जब आप खुशियों की जगह नेगेटिव सोचंगे तो खुशियाँ कहाँ से पायेंगे ? अब सवाल है कि खुशियाँ कैसे चुनी जाये इसके लिए आपको रोज़ सुबह उठकर खुद से ही दोहराना है कि आपकी जिंदगी उपरवाले की दी हुई है और इसका कण्ट्रोल उसके हाथ में है और वो जो आपके लिय चुनेगा सबसे बढ़िया होगा. जो कुछ भी होगा एकदम बढ़िया होगा और आप हमेशा खुश रहेंगे।

अध्याय 16, 17, 18 और 19: आपका सब-कोंशेस माइंड और इंसानी रिश्ते, माफ़ करना, मेंटल ब्लोक्स और डर:

Sigmund Freud (सिगमंड फ्राईड), psychoanalysis (साइकोऐनालिसिस) के ऑसट्रेयन फाउन्डर कहते है कि जब किसी की अंदर प्यार नहीं होता है तो उसकी आत्मा धीरे-धीरे मर जाती है. यही बात गुडविल, रेस्पेक्ट और अंडरस्टेंडिंग के साथ भी है। क्योंकि जब आप दिल में नफरत पालते है तो अपनी आत्मा और दिमाग को किसी कैदी की तरह हमेशा के लिए बाँध लेते है.

जितना हो सके सबका भला सोचिये और कोशिश करे कि किसी को भी नुकसान ना पहुंचे. नफरत करने वाला इंसान का हाल वही है जो ज़हर पीता है और सोचता है कि उसे कुछ नहीं होगा. ये पागलपन है क्यों है ना ? तो आप क्यों दुसरो को धोखा देते हो, हर्ट करते हो, उन्हें दुःख देते हो जब आपको पता है कि ऐसा करने से आपके दिमाग में भी ज़हर भर जायेगा, आपका खुद का नुक्सान होगा. लोगो को रेस्पेक्ट दो और उनसे हमेशा अच्छे से पेश आओ जैसा आप खुद के लिए चाहते हो वैसा व्यवहार दुसरो से करो. आप दुसरो के बारे में क्या सोचते है ये सिर्फ आपके हाथ में है, औरो के नहीं. जब आपको कोई तंग करने की कोशिश करता है तो ये आपके हाथ में है कि आप क्या रीएक्शन देंगे, दुसरो की हरकतों से आप क्या महसूस करते है ये भी सिर्फ आपके हाथ में है.

अब चाहे आप उस बात से चिढ कर पूरा दिन खराब कर ले या फिर उनकी बातो को इग्नोर करना सीख जाए. उन्हें माफ़ करना सीख जाए. लोगो को माफ़ करना दरअसल दिमाग के लिए नेगेटिव विचारों के खिलाफ एक एंटी-डॉट की तरह काम करता है. जब आप लोगो को माफ़ करते है तो आपकी आत्मा एक शान्ति और सुकून से भर जाती है. और एक तरह से लोगो को माफ़ करके आप लाइफ को पेबैक भी करते है क्योंकि जिंदगी हमेशा आपको मौके देती है. जब कभी गलती से आपकी ऊँगली कट जाती है या पैर पर चोट लग जाती है तो आपका सब-कोशेस भी कुछ इसी तरह आपको माफ़ करता है, उस चोट को हील करके.

एक आदमी था जो दिन रात इतनी मेहनत करता था कि एक दिन उसे हार्ट प्रॉब्लम हो गयी उस आदमी ने कभी मुश्किल से ही अपने बच्चो के साथ वक्त बिताया था. हमारे लेखक ने उससे बात की. उसने उस आदमी को समझाया कि उसके ऐसा करने की वजह यही है कि उसे अपने बच्चो को वक्त ना देने का दुःख अंदर ही अंदर खाए जा रहा था और दिन रात कड़ी मेहनत करके वो एक तरह से खुद को सजा दे रहा था. उसे खुद को माफ़ करना सीखन होगा तभी वो खुश रह पायेगा.

हम इंसान आदत से लाचार होते है. बुरी आदत और अच्छी आदत के बीच सिर्फ एक चुनाव का फर्क होता है. आप क्या चुनते है ये आपकी मर्जी है चाहे तो आप बुरी आदत अपनाए या अच्छी सब आपके हाथ में है. बुरी आदत को दूर करने के लिए उसे इग्नोर ना करे. एडमिट करे कि वो आपकी बुरी आदत है और उसे दूर करना है. बहुत से शराबी जिंदगी भर शराब नहीं छोड़ पाते क्योंकि वे मानते ही नहीं कि वे शराबी है. उन्हें शर्म आती है ये मानने में, पछतावा होता है और उनके ईगो को ठेस पहुँचती है और नतीजा ये कि वे कभी भी इससे छुटकारा नहीं पा सकते.

कोई भी आदत अपनाने के लिए पहले खुद को तैयार करना होगा. जब आप इस पॉइंट पर आ जाये कि आपको अपनी कोई बुरी आदत छोडनी ही छोडनी है तो खुद की पीठ थपथपाये क्योंकि आपने आधा किला फतह कर लिया है. अपने सब कोंशेस को कंट्रोल करने की राह में पहला रोड़ा है आपका डर. इसे दूर करने के लिए आप वही कीजिये जिसे करने से आपको सबसे ज्यादा डर लगता है. एक बार एक लेडी एक ऑडीशन देने पहुंची. हालांकि अपने स्टेज फोबिया की वजह से वो तीन बार पहले फेल हो चुकी थी. उसकी आवाज़ में जादू था मगर उसके नेगेटिव ख्याल उसके सब-कोंशेस पर जमे हुए थे और इसीलिए हर बार स्टेज पर जाने के ख्याल से ही वो डर जाती थी.

उसने इसका जो इलाज निकाला वो बेमिशाल था. वो खुद को दिन में तीन बार कमरे में बंद कर लेती थी. एक चेयर पर बैठकर रीलेक्स होकर वो अपनी आँखे बंद कर लेती थी. फिर वो खुद में दोहराया करती कि उसके पास गज़ब की आवाज़ है जिसकी बदौलत वो किसी का भी दिल जीत सकती है. वो खुद से दस-दस बार कहती थी कि उसे स्टेज पर डर लगता. जिस दिन उसका ऑडीशन था उसके एक रात सोने से पहले उसने ये टेक्निक दोहराई और कमाल की बात है कि ये काम कर गई. वो ऑडीशन देने के लिए स्टेज पर चढ़ी, बहुत ही ख़ूबसूरती से गाया और लोगो पर अपनी आवाज़ का जादू चला दिया !


अध्याय 20 : जवाँ-दिल कैसे बने रहे हमेशा


लेखक के एक पडोसी को रिटायमेंट इसलिए लेनी पड़ी क्योंकि वे 65 साल के हो गए थे. उस आदमी ने लेखक को कहा कि उसके लिए रिटायर्मेंट किंडरगारटेन से फर्स्ट ग्रेड में जाने जैसा है. उसके लिए ये जिंदगी और विजडम की राह में एक और कदम रखने जैसा है. उसका सोचना कितना सही है. हमे उम्र को इसी तरह लेना चाहिए. उम्र का मतलब सिर्फ सालो का पड़ाव तय करना नहीं है। बल्कि अनुभवों और समझदारी के अलग-अलग पडावो से गुजरना है. और यही मरते दम तक चलाना चाहिए कि हम जिंदगी का भरपूर फायदा उठाते रहे. 65 से 95 साल की उम्र के बहुत से साइंटिस्ट ने यही किया है, उन्होंने जिंदगी को भरपूर जिया, अनुभव लिए और बहुत कुछ सीखा.


जिन्हें मरने से, बूडा होने से डर लगता है उनके अक्सर ऑर्गन फेल हो जाते है वे उम्र के नेचुरल प्रोसेस को समझना नहीं चाहते इसलिए मरने से डरते है. जब डर उनपर हावी हो जाता है तो उनके सब- कोंशेस में नेगेटिव विचार जमा होने लगते है जो अपने साथ बहुत सी बिमारियां लाते है. दोस्तो ये बुक Joseph Murphy ने लिखी है और इसे पबलिश किया है अमेजिंग रीडस ने और इसका साला क्रेडिट उन्ही को जाता है। हमारा इस समरी को बनाने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि हम लिसनर को मोटीवेट कर सके ये बुक खरीदने के लिये ।


फाइनली अगर आप इस समरी के एन्ड तक पहुंच गए है तो Congratulation बहुत ही कम लोग होते है जो नॉलेज के ऊपर टाइम इन्वेस्ट करते है वार्ना आप कही और भी तो टाइम वेस्ट कर सकते थे.



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The Psychology of Money
By Morgan Housel



1. कोई भी मूर्ख नहीं है


धन के साथ आपके व्यक्तिगत अनुभव, संसार में क्या हुआ, शायद उसका 0.00000001% मात्र हैं, लेकिन आपके विचारानुसार संसार कैसे चलता है, उसका 80% हैं।


मैं आपको एक समस्या के बारे में बताना चाहूँगा। इसे जानकर आप अपने पैसों के साथ क्या करते हैं इस बारे में बेहतर महसूस करेंगे, और दूसरे अपने पैसों के साथ क्या करते हैं। इस बारे में कम आलोचनात्मक।

लोग पैसों के साथ कुछ मूर्खतापूर्ण हरकर्ते करते ज़रूर हैं, लेकिन कोई भी मूर्ख नहीं है। बात असल में यह है अलग अलग पीढ़ियों के लोग, जिनका पालन पोषण करने वाले माता पिता की आय अलग है, जीवन मूल्य अलग हैं, जो विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग अर्थव्यवस्था में जन्मे, जिन्होंने अलग अलग जॉब मार्केट में विविध प्रकार के प्रोत्साहन और भाग्य का अनुभव किया, वे एक दूसरे से बहुत अलग पाठ सीखते हैं।

दुनिया कैसे चलती है, इस बारे में हर किसी का अपना ही अनुभव होता है। और जो आपने अनुभव किया है. वह कहीं अधिक प्रभावशाली है उसके मुक़ाबले जो आप किसी और से सुनते या सीखते हैं। इसलिये हम सब आप मैं, और हर व्यक्ति धन-दौलत कैसे काम करती है, इससे संबंधी अपने मूल्यों के सहारे अपना जीवन गुजारते हैं, और अलग अलग लोगों के लिये इन मूल्यों में ज़मीन आसमान का फ़र्क हो सकता है। जो आपको मूर्खतापूर्ण लगे वह मेरे लिये मायने रख सकता है।


जो व्यक्ति ग़रीबी में पला बढ़ा वह जोखिम और प्रतिफल के बारे में जैसे सोचता है, एक समृद्ध बैंकर की संतान चाहे भी तो वैसे न सोच पाये। एक व्यक्ति जो ऐसे समय में पला बढ़ा जब मुद्रास्फीति की दर अधिक थी, उसने वह अनुभव किया जो उस व्यक्ति को नहीं करना पड़ा जो स्थिर कीमतों के बीच पला बढ़ा।

एक स्टॉक ब्रोकर जिसने महामंदी में अपना सब कुछ गँवा दिया, उसने जो अनुभव किया, 1990 के दशक के वैभव में काम करने वाला एक तकनीकी कर्मचारी उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता।

एक ऑस्ट्रेलियन जिसने 30 वर्षों में कोई आर्थिक मंदी नहीं देखी, उसने कुछ ऐसा अनुभव किया है जो किसी अमरीकी नागरिक ने कभी नहीं किया। बस इतना ही नहीं अनुभवों की यह सूची असंख्य है।

आप धन-दौलत के बारे में कुछ ऐसा जानते हैं जो मैं नहीं जानता, और इसका विपरीत भी उतना ही सच है। जिन धारणाओं, उद्देश्यों, पूर्वानुमानों के साथ आप अपना जीवन जीते हैं, वह मुझसे अलग हो सकता है। ऐसा इसलिये नहीं है कि हममें से एक दूसरे से अधिक होशियार है या अधिक जानकारी रखता है। ऐसा इसलिये है कि हमारे जीवन अलग हैं, जो हमारे विविध और बराबरी के ठोस अनुभवों से रचे हैं।

धन के साथ आपके व्यक्तिगत अनुभव, संसार में क्या हुआ, शायद उसका 0.00000001% मात्र हैं, लेकिन आपके विचारानुसार संसार कैसे चलता है, उसका 80% हैं। इसलिये समान रूप से होशियार लोग इस बात पर बहस कर सकते हैं कि मंदी कैसे और क्यूँ होती है, आपको निवेश कैसे करना चाहिये, आपको किसे प्राथमिकता देनी चाहिये, कितना जोखिम उठाना चाहिये आदि ।


1930 के अमरीका पराखी अपनी किताब में फ्रेडरिक लुईस ऐलन ने लिखा कि महामंदी ने लाखों अमरीकियों को उनके शेष जीवनकाल के लिये अंदरूनी तौर पर प्रभावित किया है। लेकिन अनुभवों में काफ़ी विभिन्नता थी। 25 वर्ष बाद जब जॉन एफ केनेडी राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे, एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि उन्हें महामंदी के बारे में क्या याद है। उन्होंने टिप्पणी की:

मुझे महामंदी के बारे में कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं। मेरा परिवार दुनिया के सबसे धनी परिवारों में से एक था और यह उस समय काफ़ी था। हमारे पास बड़े घर, नौकर-चाकर थे, और हम बहुत घूमा फ़िरा करते थे। जो चीज मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखी वह बस यह थी कि मेरे पिता ने कुछ और मालियों को सिर्फ़ इसलिये काम पर रखा कि उन्हें नौकरी मिल जाये जिससे वे अपना पेट भर सकें। मुझे महामंदी के बारे में कुछ पता नहीं था जब तक मैंने हार्वर्ड में इसके बारें में नहीं पढ़ा।

यह 1960 के चुनाव का एक मुख्य मुद्दा था। लोगों को लगा कि कैसे कोई ऐसा व्यक्ति अर्थव्यवस्था की बागडोर संभाल सकता था जिसे पिछली पीढ़ी के सबसे बड़े आर्थिक वृत्तांत की कोई जानकारी ही नहीं थी? इसका क्षतिपूरण काफ़ी हद तक जे एफ़ के के द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभव के द्वारा हो गया। यह पिछली पीढ़ी में व्यापक एक दूसरा भावनात्मक अनुभव था, जो उनके मुख्य प्रतिद्वंदी, हुबर्ट हम्फरे के पास नहीं था।

हमारे सामने चुनौती यह है कि अध्य्यन या ग्रहणशीलता की कोई भी मात्रा, भय और अनिश्चितता की शक्ति को उत्पन्न नहीं कर सकते।

मैं इस बारे में पढ़ सकता हूँ कि महामंदी में अपना सब कुछ गँवा देना कैसा रहा होगा। लेकिन मेरे मन में उन लोगों की तरह भावनात्मक घाव नहीं हैं जिन्होंने वास्तव में यह अनुभव किया। और कोई ऐसा व्यक्ति जिसने यह सब अनुभव किया यह नहीं समझ सकता कि मेरे जैसा व्यक्ति स्टॉक्स ख़रीद कर रखने जैसे विषयों में असावधान कैसे हो सकता है। हम दुनिया को बिल्कुल अलग नज़रिये से देखते हैं।

स्प्रेडशीट बड़ी स्टॉक मार्केट गिरावटों की ऐतिहासिक आवृत्ति का मॉडल पेश कर सकती हैं। लेकिन स्प्रेडशीट उस भावना का मॉडल पेश नहीं कर सकती, जो आप घर पहुँच कर अपने बच्चों की ओर देखकर सोचते हुए अनुभव करेंगे कि आपने ऐसी गलती की है। जिससे उनका जीवन प्रभावित हो सकता है। इतिहास पढ़ने से आपको यह ज़रूर लगता है कि आप कुछ जानते हैं, लेकिन जब तक आपने उसे जिया न हो, और उसके नतीजों को व्यक्तिगत तौर पर महसूस न किया हो आप उसे इतना नहीं समझ पायेंगे जिससे आपके व्यवहार में बदलाव आ सके।

हम सब को लगता है कि हम जानते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। लेकिन हम सबने इसके एक तिनके मात्र का ही अनुभव किया है।

जैसा कि निवेशक बैटनिक कहते हैं, “कुछ सबक ऐसे होते हैं जिन्हें समझने से पहले हमें उनका अनुभव करना आवश्यक है।" और हम सब किसी न किसी तरह, इस सच के शिकार हैं।

2006 में नेश्नल ब्यूरो ऑफ़ इक्नॉमिक रिसर्च के अर्थशास्त्री अलराइक मैल्मैडियर और स्टीफ़न नेगल ने सर्वे ऑफ़ कंज्यूमर फ़ाइनेंसेज़ के 50 वर्ष के कार्य का अध्ययन किया, जिसमें अमरीकी लोग अपने पैसे के साथ क्या करते हैं, इस विषय पर विस्तृत जानकारी थी।'


परिकल्पना के अनुसार लोगों को अपने निवेश संबंधी निर्णय अपने लक्ष्यों और उस समय में उपलब्ध निवेश विकल्पों के अनुसार लेने चाहिये।


लेकिन लोग ऐसा करते नहीं। अर्थशास्त्रियों ने पाया कि लोगों के जीवन भर के निवेश निर्णय उनके उन अनुभवों से दृढ़तापूर्वक जुड़े होते हैं जो उन्होंने अपने जीवनकाल में देखे- मुख्यतः शुरुआती वयस्कता में।

अगर आप ऐसे समय में बड़े हुए जब मुद्रास्फीति की दर अधिक थी, तो आपने आगे जाकर अपना पैसा बॉन्ड में कम निवेश किया, उनके मुकाबले जो कम मुद्रास्फीति के समय में पले बढ़े। यदि आप ऐसे समय में पले बढ़े जब स्टॉक मार्केट मज़बूत था तो आपने आगे जाकर अपना पैसा बॉन्ड में अधिक निवेश किया, उनके मुकाबले जो स्टॉक मार्केट कमज़ोर होने के समय में पले बढ़े।


अर्थशास्त्रियों ने लिखा: “हमारी खोज दर्शाती है कि एक निवेशक की जोखिम उठाने की स्वेच्छा उसके व्यक्तिगत इतिहास पर निर्भर करती है।" न तो बुद्धिमत्ता, न शिक्षा, और न ही परिष्करण मात्र संयोग कि आप कब और कहाँ जन्मे ।


फाइनैंश्यल टाइम्स ने 2019 में प्रसिद्ध बॉन्ड मैनेजर बिल ग्रॉस का साक्षात्कार किया। "ग्रॉस मानते हैं कि आज वे जहाँ हैं वहाँ नहीं होते अगर वे एक दशक पहले या बाद जन्मे होते, " लेख का कहना था । ग्रॉस के करियर ने ढ़हती ब्याज दरों के साथ अच्छा मेल खाया जिससे बॉन्ड की कीमतों को अनुवात मिल गया। इस तरह की घटनाओं से न सिर्फ़ आपको • मिलने वाले अवसर प्रभावित होते हैं, इससे जब वे अवसर आपकी ओर आते हैं तो उन अवसरों के बारे में आपकी सोच भी प्रभावित होती है। ग्रॉस के लिये बॉन्ड पैसा बनाने की मशीन के सामान थे। उनके पिता की पीढ़ी के लिये, जो मुद्रास्फीति की ऊँची दर के समय बड़े हुए और उसे झेला, बॉन्ड धन भस्मक प्रतीत होंगे।

धन-दौलत को लेकर लोगों के अनुभवों में जो अंतर है वह छोटा नहीं है, उन लोगों के बीच भी जहाँ आपको यह अनुभव एक जैसे लगें।

अब स्टॉक को ही लीजिये। अगर आपका जन्म 1970 में हुआ, आपकी किशोरावस्था और युवावस्था के समय एस एंड पी 500 लगभग 10 गुना बढ़ा. मुद्रास्फीति समायोजित होकर। यह एक अद्भुत प्रतिफल है। अगर आपका जन्म 1950 में हुआ, तो मार्केट आपकी किशोरावस्था और युवावस्था के समय मुद्रास्फीति समायोजित होकर कहीं भी नहीं गया। लोगों के ये दो अलग समूह, अपने जन्म का वर्ष अलग होने के कारण, स्टॉक मार्केट को लेकर विविध दृष्टिकोण के साथ अपना जीवन गुज़ारते हैं।